72 घंटे बाद खत्म हुआ रुद्रप्रयाग गुरुद्वारा गतिरोध, तलवार-भालों के साथ पहुंचे निहंग सिखों का धरना खत्म, खाली किया परिसर

Uttarakhand Gurdwara Standoff Uttarakhand Gurdwara Standoff

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक गुरुद्वारे में निहंग सिखों और प्रशासन के बीच करीब 72 घंटे से चला आ रहा गतिरोध मंगलवार शाम समाप्त हो गया। अधिकारियों के अनुसार, पंजाब से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बाद निहंग सिखों ने गुरुद्वारा परिसर खाली कर दिया। इसके साथ ही क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो गई। जिला प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन ने पूरे घटनाक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का दावा किया है।

बातचीत के बाद निकला समाधान

रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने बताया कि गुरुद्वारा प्रबंधन और पुलिस प्रशासन ने मिलकर विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराया। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल सभी लोग अब परिसर छोड़ चुके हैं और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में निहंग सिख मोटरसाइकिलों पर सवार होकर गुरुद्वारे से निकलते दिखाई दिए। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके सुरक्षित और व्यवस्थित प्रस्थान में सहयोग किया।

शनिवार से शुरू हुआ था विवाद

यह गतिरोध शनिवार को शुरू हुआ था, जब तलवारों और भालों से लैस करीब आधा दर्जन निहंग सिख बदरीनाथ हाईवे पर स्थित गुरुद्वारे में पहुंच गए थे। उन्होंने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों और छत पर कब्जा कर लिया था तथा छत की ओर जाने वाले रास्ते को भी अवरुद्ध कर दिया था। प्रशासन के कई दौर के अनुरोध के बावजूद वे परिसर छोड़ने को तैयार नहीं हुए और लगातार वहीं डटे रहे।

चमोली की घटना से जुड़ा है मामला

अधिकारियों के मुताबिक, यह विवाद 16 जून को चमोली जिले में हुई एक घटना के बाद शुरू हुआ था। उस मामले में निहंग सिख समुदाय के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद समुदाय के कुछ लोगों ने आगामी प्रदर्शन के लिए ठहरने की व्यवस्था की मांग की। गुरुद्वारा प्रबंधन ने सीमित क्षमता का हवाला देते हुए पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई, जिसके बाद तनाव बढ़ गया और मामला टकराव में बदल गया।

छत पर डटे रहे निहंग सिख

स्थिति बिगड़ने के बाद निहंग सिख गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों और छत पर चढ़ गए। प्रशासन ने कई बार उन्हें नीचे उतरकर परिसर खाली करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मांगें पूरी होने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया। आखिरकार पंजाब से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल और स्थानीय प्रशासन की पहल पर बातचीत सफल रही, जिसके बाद गतिरोध समाप्त हो गया।

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