न्यूज डेस्क। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के मंजाकोट इलाके का कलाबन गांव इन दिनों भारी संकट से गुजर रहा है। गांव की जमीन लगातार धंस रही है, जिससे घर, खेत और सड़कें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। रविवार सुबह हालात तब और गंभीर हो गए जब कई मकानों में अचानक बड़ी दरारें पड़ गईं और मुख्य सड़क बीच से फटकर दो हिस्सों में बंट गई। गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क भी प्रभावित हुआ है। लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं और आने वाले मानसून को लेकर डर का माहौल बना हुआ है।
एक हफ्ते से जारी है जमीन धंसने का सिलसिला
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले इलाके में भूस्खलन की शुरुआती घटना हुई थी। इसके बाद जमीन धीरे-धीरे धंसने लगी और अब हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। दुकानदार बिलाल अहमद ने बताया कि वह अपनी दुकान पर मौजूद थे तभी अचानक दीवारों से आवाज आने लगी और फर्श में बड़ी दरारें पड़ गईं। उन्होंने तुरंत बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। गांव के कई परिवारों ने भी इसी तरह की घटनाओं का सामना किया है।
सड़क फटी, खेत तबाह, घर रहने लायक नहीं
कलाबन गांव की तस्वीरें हालात की गंभीरता बयां कर रही हैं। कई मकान या तो पूरी तरह ढह चुके हैं या उनमें इतनी बड़ी दरारें आ गई हैं कि उनमें रहना खतरे से खाली नहीं है। कृषि भूमि भी प्रभावित हुई है और सैकड़ों कनाल उपजाऊ जमीन को नुकसान पहुंचा है। गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क कई जगह से टूट चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन दरारें और चौड़ी होती जा रही हैं।
प्रशासन ने किया नुकसान का आकलन
राजौरी के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। शुरुआती आकलन में तीन मकानों के पूरी तरह ढहने की पुष्टि हुई है जबकि कई अन्य घरों में गंभीर दरारें मिली हैं। राजस्व विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं और नुकसान का विस्तृत आंकलन किया जा रहा है। प्रशासन प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर रहा है।
मानसून से पहले बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द राहत और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हुई तो बारिश के मौसम में स्थिति और खतरनाक हो सकती है। कई लोगों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर बसाने और आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि जिन घरों में दरारें पड़ चुकी हैं वे अगली बारिश भी शायद नहीं झेल पाएंगे। लोग रातें जागकर गुजार रहे हैं क्योंकि जमीन अब भी कई जगह खिसक रही है।
हाईवे निर्माण पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य को इस आपदा की एक बड़ी वजह बताया है। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान भारी मशीनों से पहाड़ी और जमीन की कटाई की गई, जिससे मिट्टी कमजोर हो गई। अब वही जमीन धीरे-धीरे धंस रही है और पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है। हालांकि प्रशासन ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय लोग इसकी जांच की मांग कर रहे हैं।
