RSS रजिस्ट्रेशन विवाद: मोहन भागवत बोले- सरकार हमें जानती है; 100 साल में किसी ने नहीं मांगा पंजीकरण

Mohan Bhagwat Mohan Bhagwat

न्यूज डेस्क।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे की उस मांग पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने आरएसएस को आधिकारिक तौर पर पंजीकृत करने और उसकी फंडिंग समेत अन्य जानकारियां सार्वजनिक करने की बात कही थी। भागवत ने साफ कहा कि वह इस पत्र का जवाब नहीं देंगे क्योंकि यह राजनीतिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि संघ को इस तरह के आरोपों और सवालों का सामना करने की आदत है और अगर ऐसे विवाद न हों तो उन्हें कुछ कमी महसूस होती है।

‘हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है’
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में कई ऐसी संस्थाएं और व्यवस्थाएं हैं जो रजिस्टर्ड नहीं हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू धर्म भी कहीं रजिस्टर्ड नहीं है। उनके मुताबिक रजिस्ट्रेशन की जरूरत आमतौर पर उन्हें होती है जो सरकार से आर्थिक सहायता या फंड लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस को सरकार अच्छी तरह जानती है और उसके अस्तित्व को लेकर कभी कोई सवाल नहीं रहा।

ब्रिटिश काल से सक्रिय है संघ
भागवत ने कहा कि आरएसएस की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान जन आंदोलन के रूप में हुई थी। उन्होंने याद दिलाया कि संघ पर दो बार प्रतिबंध लगाया गया था। एक बार अदालत के आदेश और दूसरी बार सत्याग्रह के बाद प्रतिबंध हटाया गया। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो इसका मतलब है कि सरकार को संघ के बारे में पूरी जानकारी थी। उन्होंने यह भी बताया कि संघ का लिखित संविधान 1950 के दशक में सरकार को सौंपा जा चुका है।

प्रियंक खड़गे ने उठाए थे पारदर्शिता के सवाल
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रियंक खड़गे ने खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जब नागरिकों, ट्रस्टों, मंदिरों, गैर सरकारी संगठनों और कंपनियों को पंजीकरण और वित्तीय खुलासे करने पड़ते हैं तो आरएसएस को इससे छूट क्यों मिले। खड़गे ने मांग की थी कि संघ अपने पदाधिकारियों, आय के स्रोतों, खर्च, कर भुगतान और सार्वजनिक गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक करे।

कर्नाटक में संघ की गतिविधियों का भी किया जिक्र
प्रियंक खड़गे ने अपने पत्र में आरएसएस की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि कर्नाटक में संगठन की हजारों शाखाएं और लाखों स्वयंसेवक सक्रिय हैं। उनके मुताबिक राज्य में 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन, 60 मासिक मंडलियां और 2,194 सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 19.61 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 562 पथ संचलनों में 2.21 लाख गणवेशधारी स्वयंसेवक शामिल हुए।

‘यह सब राजनीतिक बयानबाजी है’
मोहन भागवत ने इन सवालों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। उन्होंने कहा कि संघ खुले तौर पर काम करता है और उसकी गतिविधियां किसी से छिपी नहीं हैं। उनके मुताबिक पिछले 100 वर्षों में किसी सरकार ने संघ को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए बाध्य नहीं किया। उन्होंने कहा कि संगठन का पूरा ढांचा और संविधान पहले से सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद है, इसलिए इस तरह के सवाल सिर्फ राजनीति का हिस्सा हैं।

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