ईरान में खामेनेई को अंतिम विदाई: कई देशों के नेता पहुंचे; बेटे मोजतबा की गैरमौजूदगी पर चर्चा

Khamenei Funeral Khamenei Funeral

वर्ल्ड डेस्क।तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए भव्य राजकीय समारोह शुरू हो गया। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में 28 फरवरी को उनकी मौत के करीब चार महीने बाद यह सप्ताहभर चलने वाला अंतिम संस्कार आयोजित किया जा रहा है। ईरानी सरकार इसे केवल श्रद्धांजलि समारोह नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता और राजनीतिक मजबूती के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रही है। अंतिम संस्कार में भारत, पाकिस्तान, रूस, चीन समेत कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है, जबकि समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई है।

तेहरान से मशहद तक चलेगा अंतिम संस्कार

शुक्रवार को तेहरान के ग्रेट प्रेयर हॉल में खामेनेई और उनके परिवार के ताबूत आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखे गए। सरकारी अधिकारियों, सैन्य कमांडरों और हजारों समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री समेत कई शीर्ष नेता ताबूत के सामने भावुक नजर आए। इसके बाद अंतिम यात्रा तेहरान से कुम, नजफ और करबला होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां इमाम रजा की दरगाह के पास उन्हें दफनाया जाएगा।

बेटे मोजतबा की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

समारोह में खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। आधिकारिक तौर पर इसकी वजह सुरक्षा खतरा बताई गई है। माना जा रहा है कि फरवरी के हमले में वह भी घायल हुए थे और तभी से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए हैं। हालांकि उन्होंने राज्य टेलीविजन के जरिए कुछ संदेश जारी किए हैं। उनकी अनुपस्थिति ने ईरान की भावी नेतृत्व व्यवस्था को लेकर नई अटकलों को भी जन्म दिया है।

धार्मिक प्रतीकों के जरिए दिया गया संदेश

अंतिम संस्कार को पूरी तरह धार्मिक और राजनीतिक प्रतीकों से सजाया गया। ताबूत पर काली पगड़ी रखी गई, जो पैगंबर मोहम्मद के वंशज होने का प्रतीक मानी जाती है। साथ ही काला शोक ध्वज और फिलिस्तीन समर्थक चेकदार स्कार्फ भी रखा गया। पूरे तेहरान में काले झंडे लगाए गए हैं, जो शिया परंपरा में इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाते हैं। ईरानी नेतृत्व खामेनेई को शहादत के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है।

भारत समेत कई देशों की मौजूदगी

भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह में शामिल नहीं हुए, लेकिन केंद्र सरकार ने बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा को आधिकारिक प्रतिनिधि बनाया है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में एक अंतरधार्मिक प्रतिनिधिमंडल ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। रूस और चीन के प्रतिनिधियों के भी समारोह में पहुंचने की संभावना है।

शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश

विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम संस्कार का आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं है। ईरान इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अपने समर्थकों के सामने मजबूती का संदेश देने के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और घरेलू चुनौतियों का सामना कर रहे ईरान के लिए यह आयोजन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि खामेनेई की विरासत को मजबूत करते हुए देश में एकजुटता का संदेश दिया जाए।

अगले सप्ताह तक जारी रहेगा कार्यक्रम

ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार का कार्यक्रम पूरे सप्ताह चलेगा। सोमवार को तेहरान में विशाल जन जुलूस निकलेगा। इसके बाद मंगलवार को कुम, बुधवार को इराक के नजफ और करबला तथा गुरुवार को मशहद में अंतिम धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इस दौरान लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। पूरी दुनिया की नजर अब ईरान पर टिकी हुई है, जहां यह अंतिम विदाई समारोह देश की राजनीतिक दिशा और भविष्य के नेतृत्व को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।