Telegram Ban पर भड़के Pavel Durov: 15 करोड़ यूजर्स हुए प्रभावित; बोले- लीक दूसरे ऐप्स पर पहुंच गए

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वर्ल्ड न्यूज। टेलीग्राम पर एक हफ्ते के लिए लगे प्रतिबंध को लेकर विवाद बढ़ गया है। नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने पेपर लीक और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए ऐप को अस्थायी तौर पर ब्लॉक किया, लेकिन अब टेलीग्राम के सीईओ पावेल दुरोव ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की है। दुरोव ने कहा कि इससे पेपर लीक करने वाले नहीं, बल्कि भारत के 15 करोड़ से ज्यादा सामान्य यूजर्स प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंध के बाद भी लीक रुकने के बजाय दूसरे ऐप्स पर शिफ्ट हो गए।

दुरोव बोले- यह करोड़ों आम यूजर्स को सजा देने जैसा

दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के आईटी मंत्रालय ने कुछ यूजर्स द्वारा लीक हुए परीक्षा प्रश्न साझा करने के कारण टेलीग्राम को एक सप्ताह के लिए बैन कर दिया। उनके मुताबिक यह कदम गलत लोगों को निशाना बनाने के बजाय करोड़ों आम यूजर्स को सजा देने जैसा है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध से कुछ भी नहीं रुका और कथित लीक दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर पहुंच गए।

एनटीए ने टेलीग्राम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया
दरअसल, 21 जून को होने वाली नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने टेलीग्राम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने बताया कि कई चैनल छात्रों से 14 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक वसूलकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे। एजेंसी ने साफ कहा कि री-एग्जाम का कोई पेपर लीक नहीं हुआ है और ऐसे दावे पूरी तरह फर्जी हैं।

एंड्रॉयड यूजर्स के लिए टेलीग्राम डाउनलोड करना बंद
एनटीए ने यह भी बताया कि कुछ गिरोह टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पुराने संदेशों को बदलकर उन्हें पहले से भेजा गया दिखा रहे थे। इसी वजह से सरकार ने गूगल और एप्पल से 22 जून तक ऐप को अपने स्टोर से हटाने को कहा। एंड्रॉयड यूजर्स के लिए टेलीग्राम डाउनलोड करना बंद हो गया है, जबकि आईफोन पर नए अकाउंट एक्टिवेट करने में भी दिक्कतें सामने आई हैं। सरकार टेलीग्राम से 30 जून तक मैसेज एडिट फीचर अस्थायी रूप से बंद करने पर भी चर्चा कर रही है।

इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है
हालांकि इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध को असंगत और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार विशेष कंटेंट को ब्लॉक कर सकती है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना या किसी कंपनी को अपने प्रोडक्ट की डिजाइन बदलने के लिए मजबूर करना कानून के दायरे से बाहर है। फाउंडेशन ने इसे परीक्षा धोखाधड़ी से निपटने के लिए “बैंड-एड समाधान” करार दिया।

एनटीए ने सतर्क रहने की अपील की है
इस बीच एनटीए ने छात्रों और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी का कहना है कि री-एग्जाम को पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराने की तैयारी की गई है। एनटीए ने चेतावनी दी है कि किसी भी फर्जी चैनल, संदेश या कथित पेपर लीक के झांसे में न आएं और किसी को पैसे न भेजें। एजेंसी का दावा है कि 21 जून की परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।

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