राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट तैयार, बड़े एक्शन की तैयारी,22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक में हो सकते हैं बड़े फैसले

Ram Temple Donation Theft Ram Temple Donation Theft

नेशनल डेस्क। अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट कभी भी उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली, दान गिनने की व्यवस्था और नियमों में की गई ढील को लेकर कई अहम टिप्पणियां की गई हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के बाद मंदिर ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

नियमों में बदलाव से बढ़ी गड़बड़ी की आशंका
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से निगरानी में कमी और प्रशासनिक लापरवाही का उल्लेख किया है, हालांकि उनका नाम सीधे तौर पर जिम्मेदार के रूप में नहीं लिया गया है। वहीं ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा को दान गिनने से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में बदलाव और नियमों में ढील देने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया गया है। जांच में कहा गया है कि इन बदलावों ने कथित चोरी की घटनाओं के लिए रास्ता तैयार किया।

भर्ती प्रक्रिया और दान गिनती पर उठे सवाल
एसआईटी की जांच में कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नियुक्तियां ट्रस्ट अधिकारियों की सिफारिश पर की गईं, जबकि श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती आउटसोर्स हाउसकीपिंग कर्मचारियों से कराई जा रही थी। जांच में कहा गया है कि जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं होने और निगरानी कमजोर रहने से पूरी व्यवस्था में कई खामियां पैदा हुईं, जिनका कथित आरोपियों ने फायदा उठाया।

13 जून को गठित हुई थी एसआईटी
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। पहले जांच के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसे बाद में 15 दिन और बढ़ा दिया गया। एसआईटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी पुलिस की आपराधिक जांच समानांतर रूप से जारी रहेगी और जांच एजेंसियां संबंधित लोगों से पूछताछ करती रहेंगी।

प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई थी कार्रवाई
23 जून को एसआईटी की नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, कुछ ट्रस्ट पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया और कई प्रशासनिक फैसले लिए गए। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि सरकार अंतिम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

22 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

राम मंदिर ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को अयोध्या में प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि एसआईटी की सिफारिशों पर इसी बैठक में विस्तार से चर्चा होगी और मंदिर प्रशासन व दान प्रबंधन प्रणाली में बड़े सुधारों का खाका तैयार किया जाएगा। इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, जहां शीर्ष अदालत ने एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।