साल पुरानी परंपरा में पहली बार हुआ बड़ा बदलाव
जयपुर।राजस्थान के पाली जिले के खेरवा गांव में एक ऐसा फैसला हुआ जिसने दशकों पुरानी परंपरा को नया रूप दे दिया। 13 वर्षीय तेजस्वी कुमारी जोधा को औपचारिक रूप से खेरवागढ़ शाही परिवार का उत्तराधिकारी घोषित किया गया। यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में राजपूत परंपरा के तहत किसी लड़की को “पाग का दस्तूर” समारोह के माध्यम से उत्तराधिकार सौंपा गया है। लंबे समय से यह परंपरा केवल पुरुष उत्तराधिकारियों तक सीमित रही थी, लेकिन इस बार समुदाय ने परंपरा को बनाए रखते हुए उसमें बदलाव का रास्ता चुना।
पिता के निधन के बाद उत्तराधिकार का फैसला
तेजस्वी कुमारी जोधा के पिता हरीश चंद्र जोधा के निधन के बाद उत्तराधिकार का प्रश्न सामने आया। परिवार में कोई पुत्र नहीं होने के कारण समुदाय के वरिष्ठ लोगों और परिवार के सदस्यों ने विचार-विमर्श किया। इसके बाद सर्वसम्मति से तय किया गया कि तेजस्वी ही परिवार की वैध उत्तराधिकारी होंगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला केवल एक परिवार का निर्णय नहीं था, बल्कि बदलते सामाजिक दृष्टिकोण और महिलाओं की भूमिका को स्वीकार करने का प्रतीक भी है।
ऐतिहासिक खेरवा किले में हुआ समारोह
उत्तराधिकार का यह विशेष समारोह खेरवा किले में आयोजित किया गया। माना जाता है कि यह किला 17वीं सदी का है और क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समारोह में गांव और आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ग्रामीणों ने इसे केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं बल्कि इतिहास बनने का क्षण बताया। पूरे कार्यक्रम के दौरान परंपरा और आधुनिक सोच का अनूठा मेल देखने को मिला।
वैदिक मंत्रों के बीच निभाई गई रस्में
समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तेजस्वी कुमारी ने सभी धार्मिक और पारंपरिक प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया। उनके सिर पर गुलाबी रंग की पगड़ी बांधी गई, जिसे शोक की अवधि समाप्त होने और नई जिम्मेदारियों के स्वीकार का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार उनके माथे पर तिलक भी लगाया गया। समारोह में मौजूद लोगों ने इस पल को ऐतिहासिक बताया क्योंकि पहली बार किसी लड़की ने इस भूमिका को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।
जोधपुर राजघराने से आई पगड़ी
स्थानीय परंपरा के अनुसार इस समारोह में इस्तेमाल की गई पगड़ी जोधपुर-मारवाड़ के पूर्व शाही परिवार की ओर से भेजी गई थी। “पाग का दस्तूर” में पगड़ी का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि यह परिवार की जिम्मेदारी, सम्मान और नेतृत्व के हस्तांतरण का प्रतीक होती है। वर्षों से यह रस्म पुरुष उत्तराधिकारियों के लिए निभाई जाती रही है। इस बार उसी परंपरा का पालन करते हुए एक लड़की को उत्तराधिकारी घोषित किया गया, जिससे समारोह की ऐतिहासिक अहमियत और बढ़ गई।
क्या है ‘पाग का दस्तूर’?
पाली और पूर्व जोधपुर रियासत के कई हिस्सों में “पाग का दस्तूर” एक महत्वपूर्ण सामाजिक परंपरा मानी जाती है। परिवार के मुखिया के निधन के बाद उत्तराधिकार और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण के लिए यह रस्म आयोजित की जाती है। इसमें उत्तराधिकारी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाता है और समुदाय उसके नेतृत्व को मान्यता देता है। हालांकि अब तक यह अधिकार केवल पुरुषों को मिलता था। तेजस्वी कुमारी का चयन इस परंपरा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
65 साल से नहीं हुआ था ऐसा समारोह
स्थानीय लोगों के अनुसार खेरवा परिवार में पिछले लगभग 65 वर्षों से यह समारोह आयोजित नहीं हुआ था। इसका मुख्य कारण परिवार में पुरुष उत्तराधिकारी का न होना बताया जा रहा है। इस बार समुदाय ने उत्तराधिकार को केवल लिंग के आधार पर तय करने के बजाय परिवार की परंपरा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि तेजस्वी को उत्तराधिकारी घोषित करने का फैसला लिया गया। ग्रामीणों का मानना है कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
ग्रामीणों ने बताया प्रगतिशील कदम
समारोह में मौजूद लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया। ग्रामीणों का कहना है कि समाज बदल रहा है और महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में स्वीकार करना समय की मांग है। कई लोगों ने इसे परंपरा और समानता के बीच संतुलन बनाने वाला कदम बताया। उनका मानना है कि अगर बेटियां शिक्षा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व कर सकती हैं तो पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियां भी संभाल सकती हैं। यही सोच इस फैसले के पीछे दिखाई देती है।
पढ़ाई के साथ जिम्मेदारियां निभाएंगी तेजस्वी
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली तेजस्वी कुमारी ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी और साथ ही उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को भी निभाने की कोशिश करेंगी। उन्होंने कहा कि उनके पिता गांव के विकास को लेकर कई योजनाएं रखते थे और वह भविष्य में उन सपनों को पूरा करने का प्रयास करेंगी। तेजस्वी के इस बयान को समारोह में मौजूद लोगों ने सराहा। उनके उत्तराधिकार को केवल शाही परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि बदलते भारत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक भी माना जा रहा है।
Quick Fact Box
- नाम: तेजस्वी कुमारी जोधा
- उम्र: 13 वर्ष
- स्थान: खेरवा, पाली जिला, राजस्थान
- परिवार: खेरवागढ़ शाही परिवार
- समारोह: पाग का दस्तूर
- विशेषता: क्षेत्र की पहली महिला उत्तराधिकारी
- कक्षा: सातवीं
- अवसर: पिता हरीश चंद्र जोधा के निधन के बाद उत्तराधिकार
Timeline
- 17वीं सदी: खेरवा किले की स्थापना मानी जाती है
- पिछले 65 वर्ष: परिवार में पाग का दस्तूर नहीं हुआ
- हरीश चंद्र जोधा का निधन: उत्तराधिकार का प्रश्न उठा
- जून 2026: समुदाय ने तेजस्वी को उत्तराधिकारी बनाने का फैसला लिया
- 26 जून 2026: खेरवा किले में पाग का दस्तूर समारोह आयोजित
- 26 जून 2026: तेजस्वी कुमारी जोधा पहली महिला उत्तराधिकारी घोषित हुईं
