न्यूज डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा कर दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दी। 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा रही। इस दौरान भारत और स्लोवाकिया ने अपने संबंधों को “कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप” का दर्जा देने का फैसला किया। ब्रातिस्लावा में हुई बैठक में रक्षा, आतंकवाद विरोध, व्यापार, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, अंतरिक्ष और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने इसे भविष्य की रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव बताया।
रक्षा सहयोग पर बड़ा समझौता
यात्रा का सबसे अहम परिणाम रक्षा क्षेत्र में सामने आया। दोनों देशों ने डिफेंस कोऑपरेशन पर लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत रक्षा तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े प्रोजेक्ट्स में सहयोग बढ़ाया जाएगा। भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और स्लोवाकिया की उन्नत रक्षा उत्पादन क्षमता को देखते हुए इस साझेदारी को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने रक्षा अधिकारियों के बीच नियमित बातचीत और आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई।
पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र, जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनेगा
संयुक्त बयान में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। दोनों देशों ने इसे जघन्य आतंकी हमला बताया और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। भारत और स्लोवाकिया ने जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन काउंटर टेररिज्म बनाने का फैसला किया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के तहत आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
भारत-ईयू एफटीए से बढ़ेंगे कारोबारी मौके
दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का स्वागत किया और इसके जल्द लागू होने की उम्मीद जताई। उनका मानना है कि इससे व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। भारत-स्लोवाकिया जॉइंट इकोनॉमिक कमेटी इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का काम करेगी।
एआई, सेमीकंडक्टर और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर फोकस
भारत और स्लोवाकिया ने डिजिटल टेक्नोलॉजी पर एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन इकोसिस्टम में सहयोग शामिल है। दोनों देशों ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी साथ काम करने पर सहमति जताई। 5जी, 6जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और मशीन-टू-मशीन तकनीक को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
ऊर्जा, अंतरिक्ष और वैश्विक मंचों पर समर्थन
ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने न्यूक्लियर एनर्जी और जियोथर्मल पावर में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। अंतरिक्ष क्षेत्र में सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और उसके उपयोग को लेकर भी नई संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी। स्लोवाकिया ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन की भी पुष्टि की।
श्रम, शिक्षा और सीधी उड़ानों पर भी सहमति
दोनों देशों ने कुशल पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए लेबर माइग्रेशन पर समझौता किया। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट की दिशा में भी काम करने पर सहमति बनी। शिक्षा और शोध सहयोग के लिए अलग समझौता हुआ, जबकि फिल्म और ऑडियो-विजुअल प्रोडक्शन में साझेदारी बढ़ाने का रास्ता भी खुला। भारत और स्लोवाकिया के बीच सीधी हवाई सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और मजबूत हो सकेगा।
