6 सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ठाकरे बोले- पहले भी ऐसे संकट देखे; शिंदे गुट में शामिल होने दिल्ली पहुंचे सांसद

Uddhav Thackeray Uddhav Thackeray

मुंबई/नई दिल्ली. शिवसेना (यूबीटी) में जारी सियासी संकट के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि उन्होंने पहले भी ऐसे संकटों का सामना किया है और इससे वह टूटने वाले नहीं हैं। दूसरी ओर, बगावत करने वाले 6 लोकसभा सांसद दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां उनके एकनाथ शिंदे की शिवसेना में औपचारिक रूप से शामिल होने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की संभावना है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

संकट पर उद्धव का जवाब
उद्धव ठाकरे ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पहले भी कई राजनीतिक संकट देखे हैं और यह नया नहीं है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव में जवाब देने की अपील की। वहीं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि कई लोग आए और गए, लेकिन ठाकरे परिवार हमेशा डटा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि वह मौजूदा बगावत से घबराने के बजाय राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगा।

बागी सांसदों ने फैसले की पुष्टि की
बागी सांसद ओमराजे निंबालकर ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि फैसला लगभग तय हो चुका है और अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा बाकी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष में रहकर संसाधनों और राजनीतिक ताकत की कमी महसूस हो रही है। निंबालकर ने कहा कि लगातार संघर्ष के बावजूद विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहे हैं, इसलिए सत्ता के साथ चलने का फैसला लिया गया है।

सत्ता और संसाधनों का मुद्दा
निंबालकर ने कहा कि किसानों के लिए ट्रांसफॉर्मर जैसी बुनियादी सुविधाओं के काम भी अटक रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता से दूर रहने के कारण कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल संघर्ष करने से राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता और अब नेतृत्व व सत्ता दोनों की जरूरत है।

स्पीकर के सामने पहुंचा मामला
बागी सांसदों और उद्धव गुट दोनों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखी हैं। बागी सांसद दावा कर रहे हैं कि उनके पास दो-तिहाई संख्या बल है और वे खुद को असली शिवसेना मानते हैं। दूसरी ओर ठाकरे गुट इस कदम को दल-बदल कानून का उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहा है।

स्पीकर के फैसले पर टिकी नजर
अब पूरा मामला लोकसभा स्पीकर के फैसले पर निर्भर है। यदि स्पीकर बागी सांसदों के दावे को स्वीकार करते हैं तो वे अपनी सदस्यता बचा सकते हैं। वहीं यदि दावा खारिज हुआ तो उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है। इस फैसले का असर न केवल शिवसेना (यूबीटी) बल्कि महाराष्ट्र की व्यापक राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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