चेन्नई. तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति को लेकर जारी राजनीतिक टकराव अब और तेज हो गया है। डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के व्हाइट पेपर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि राज्य की अर्थव्यवस्था पर जारी दस्तावेज के कई हिस्से डीएमके की 2021 की व्हाइट पेपर रिपोर्ट से हूबहू लिए गए हैं। डीएमके ने इसे राजनीतिक हमला बताते हुए सरकार के कई वित्तीय दावों को भी भ्रामक करार दिया है।
डीएमके ने लगाया साहित्यिक चोरी का आरोप
डीएमके की ओर से जारी जवाबी रिपोर्ट में कहा गया है कि टीवीके सरकार के व्हाइट पेपर में कई पैराग्राफ और वाक्य बिना किसी श्रेय के सीधे कॉपी किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि कुछ हिस्सों में 22 शब्द तक लगातार एक जैसे पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक उपक्रमों और जल क्षेत्र से जुड़े अध्याय 2021 के डीएमके दस्तावेज से लगभग शब्दशः उठाए गए हैं।
फोरेंसिक जांच का दावा
डीएमके ने कहा कि उसने दोनों दस्तावेजों की तुलना के लिए कई तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया। इनमें शब्द-दर-शब्द मिलान, समान वाक्य संरचना की जांच, पैराफ्रेज डिटेक्शन और तालिकाओं व चार्ट्स की तुलना शामिल है। पार्टी का कहना है कि जांच में व्यापक स्तर पर समानताएं सामने आई हैं, जो सामान्य संयोग से कहीं ज्यादा हैं।
वित्तीय दावों पर भी उठे सवाल
डीएमके ने टीवीके सरकार के उन दावों को भी चुनौती दी है, जिनमें तमिलनाडु के राजस्व घाटे और कर्ज को रिकॉर्ड स्तर का बताया गया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने अंतिम ऑडिट आंकड़ों की बजाय शुरुआती अनुमानित आंकड़ों का इस्तेमाल किया, जिससे वित्तीय संकट को वास्तविकता से ज्यादा बड़ा दिखाने की कोशिश की गई।
क्या कहता है टीवीके का व्हाइट पेपर
मुख्यमंत्री विजय सरकार ने हाल ही में दावा किया था कि तमिलनाडु का प्रत्यक्ष कर्ज पांच वर्षों में लगभग 4.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 10 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। दस्तावेज में कहा गया कि ऑफ-बजट उधारी और अन्य देनदारियों को जोड़ने पर कुल वित्तीय बोझ 13.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार का आरोप है कि पिछली सरकार ने कर्ज का बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचा विकास के बजाय नियमित खर्चों पर खर्च किया।
डीएमके ने बताया राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश
पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने व्हाइट पेपर को पूरी तरह विफल दस्तावेज करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट में पहले ही वित्तीय स्थिति का पूरा ब्योरा दिया जा चुका है। डीएमके का आरोप है कि चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रहने के बाद सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के दस्तावेज जारी कर रही है।
