साउथ की सुर कोकिला एस. जानकी नहीं रहीं, 88 साल की उम्र में निधन; CM विजय, रजनीकांत समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

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तमिलनाडु। भारतीय फिल्म संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका और “नाइटिंगेल ऑफ साउथ इंडिया” के नाम से मशहूर एस. जानकी का शनिवार शाम 88 वर्ष की आयु में मैसूर में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, सुपरस्टार रजनीकांत, कमल हासन और चिरंजीवी समेत फिल्म और संगीत जगत की कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अस्पताल की ओर से जारी बयान के अनुसार उन्होंने 11 जुलाई की शाम करीब 7:30 बजे अंतिम सांस ली।

मुख्यमंत्री विजय बोले- भारतीय संगीत जगत की अपूरणीय क्षति

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एस. जानकी ने अपनी अनूठी आवाज से कई पीढ़ियों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उन्होंने कहा कि उनका निधन भारतीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, फिल्म जगत, संगीतकारों और दुनिया भर में मौजूद उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। विजय ने कहा कि उनकी आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनी रहेगी।

रजनीकांत, कमल हासन और चिरंजीवी ने दी श्रद्धांजलि

सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा कि अपनी मधुर आवाज से पीढ़ियों को आनंद देने वाली एस. जानकी की आत्मा को शांति मिले। अभिनेता कमल हासन ने भावुक संदेश में लिखा कि उनका गीत हमेशा गूंजता रहेगा और यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। वहीं तेलुगु सुपरस्टार चिरंजीवी ने कहा कि उनके फिल्मी सफर में जानकी अम्मा की आवाज ने अनगिनत किरदारों की भावनाओं को जीवंत बनाया। उन्होंने कहा कि एस. जानकी की आवाज अमर है और भारतीय सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

पद्म भूषण लौटाकर भारत रत्न की उठाई थी मांग

एस. जानकी वर्ष 2013 में उस समय भी चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने भारत सरकार का पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि छह दशक से अधिक समय तक भारतीय संगीत की सेवा करने के बावजूद उन्हें बहुत देर से सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके योगदान को देखते हुए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ के लिए विचार किया जाना चाहिए। उनके इस फैसले ने पूरे देश में कलाकारों के सम्मान को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी।

60 साल तक भारतीय संगीत की पहचान बनी रहीं

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में 23 अप्रैल 1938 को जन्मी एस. जानकी ने बेहद कम उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने 1957 में तमिल फिल्म ‘विधियिन विलायट्टु’ से पार्श्व गायन की शुरुआत की और उसी वर्ष छह अलग-अलग भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए। बिना औपचारिक शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लिए उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर भारतीय संगीत जगत में अलग पहचान बनाई।

चार राष्ट्रीय पुरस्कार और दर्जनों राज्य पुरस्कार से सम्मानित

एस. जानकी अपने छह दशक लंबे करियर में भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित पार्श्व गायिकाओं में शामिल रहीं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका के लिए चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले, जबकि विभिन्न राज्यों की सरकारों ने उन्हें 33 से अधिक राज्य फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। उन्होंने वर्ष 2016 में फिल्मों और मंचीय प्रस्तुतियों से संन्यास लेने की घोषणा की थी। हालांकि 2018 में उन्होंने तमिल फिल्म ‘पन्नाडी’ के लिए एक गीत गाकर अपने प्रशंसकों को आखिरी बार अपनी आवाज का उपहार दिया।

भारतीय संगीत जगत ने खो दी एक अमर आवाज

एस. जानकी के निधन के साथ भारतीय फिल्म संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। उनकी आवाज ने छह दशकों तक करोड़ों श्रोताओं की भावनाओं को स्वर दिया और दक्षिण भारतीय सिनेमा को नई पहचान दिलाई। आज भी उनके हजारों गीत भारत ही नहीं, दुनिया भर में संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं। उनके निधन से संगीत जगत ने एक ऐसी विरासत खो दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं मानी जा रही। उनकी मधुर आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा और अमूल्य धरोहर बनी रहेगी।