भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है। अब वोटर बनने के लिए आवेदन करने वाले लोगों को Form-6 के साथ एक नया घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) भी भरना होगा, जिसमें उन्हें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी जानकारी देनी होगी। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब आयोग देशभर में मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा अभियान चला रहा है। नए प्रावधान का उद्देश्य मतदाताओं की पहचान स्पष्ट करना और डुप्लीकेट या फर्जी नामों को रोकना बताया जा रहा है।
आवेदन के दौरान मिलेंगे तीन विकल्प
नए डिक्लेरेशन में आवेदकों को तीन विकल्प दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति पहले दो विकल्पों में से किसी एक का चयन करता है, तो उसे पिछली SIR प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इसमें विधानसभा क्षेत्र (Assembly Constituency), मतदान केंद्र (Polling Booth) और पिछली SIR सूची में उसका क्रमांक (Serial Number) जैसी जानकारी भरनी होगी। यदि आवेदक के पास यह जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो वह तीसरा विकल्प चुन सकता है। हालांकि चुनाव आयोग के पोर्टल पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीसरा विकल्प चुनने पर आवेदन प्रक्रिया या सत्यापन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
बिहार SIR से शुरू हुआ था यह प्रावधान
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक यह घोषणा पत्र पहली बार पिछले वर्ष जून में बिहार में शुरू किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान लागू किया गया था। बाद में जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हुई, वहां इसे मतदाता पंजीकरण प्रणाली का हिस्सा बना दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि बिहार के दैनिक SIR बुलेटिन में भी इसी तरह का फॉर्म और घोषणा पत्र शामिल था, जिससे मतदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड का मिलान करना आसान हुआ।
नए वोटरों को कम दस्तावेज देने पड़ेंगे
चुनाव आयोग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का एक फायदा यह भी होगा कि नए मतदाताओं को पहले की तुलना में कम सहायक दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे। अधिकारियों के अनुसार SIR रिकॉर्ड के जरिए आवेदक और उसके परिवार की जानकारी का मिलान आसानी से हो सकेगा। इससे पंजीकरण प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी तथा एक ही व्यक्ति के नाम पर कई जगह मतदाता पंजीकरण जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिलेगी।
पहले से Form-6 में परिवार की जानकारी देनी होती है
मौजूदा नियमों के तहत Form-6 भरते समय आवेदक को अपने साथ रहने वाले परिवार के सदस्यों की जानकारी और उनके EPIC (Electoral Photo Identity Card) नंबर भी देने होते हैं। नए डिक्लेरेशन के जरिए अब इस प्रक्रिया को और विस्तृत कर दिया गया है। इसमें परिवार और पिछले SIR रिकॉर्ड से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी। हालांकि अभी तक निर्वाचन नियम, 1960 (Registration of Electors Rules, 1960) में इस बदलाव को लेकर कोई औपचारिक संशोधन अधिसूचित नहीं किया गया है।
देशभर में चल रहा है SIR अभियान
निर्वाचन आयोग इस समय देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित, लंबे समय से अनुपस्थित और विदेशी मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाना है। आयोग का मानना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी। कई राज्यों में इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता सूची में संशोधन भी किए गए हैं।
कई राज्यों में पूरी हो चुकी है प्रक्रिया
चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह अभियान जारी है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के कारण राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा हुई है। अब नए डिक्लेरेशन को लेकर भी यह सवाल उठ रहे हैं कि भविष्य में नए आवेदकों और उन परिवारों पर इसका क्या असर पड़ेगा, जिनके सदस्यों के नाम पहले SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।
