नेशनल डेस्क. अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन का मामला अब और गहरा गया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चम्पत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा, मंदिर अधिकारी गोपाल राव समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए पुलिस को शिकायत सौंपी है। वकीलों का आरोप है कि मंदिर में चढ़ाए गए नकद और आभूषणों की व्यवस्थित तरीके से चोरी की गई और पूरे मामले में असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश हुई। इस शिकायत के बाद यह विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर और गंभीर होता दिख रहा है।
चम्पत राय समेत ट्रस्ट पदाधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
फैजाबाद बार एसोसिएशन के महासचिव अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने राम जन्मभूमि थाने में शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चम्पत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की जानकारी और कथित मिलीभगत से श्रद्धालुओं के चढ़ावे में आने वाली बड़ी रकम और कीमती जेवरात का गबन किया गया। शिकायत के मुताबिक चढ़ावे की गिनती के काम में इन्हीं लोगों के करीबी कर्मचारियों को लगाया गया, जिससे चोरी को अंजाम देना आसान हो गया। बार एसोसिएशन का कहना है कि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
दानपेटी से नकदी और जेवर चोरी का दावा
शिकायत में कहा गया है कि लंबे समय से मंदिर की दानपेटियों में आने वाली नकदी और बहुमूल्य आभूषणों की चोरी की खबरें सामने आती रही हैं। वकीलों का कहना है कि वे स्वयं राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं और नियमित रूप से मंदिर में दान भी करते रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले ने उन्हें गहराई से आहत किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दान की रकम को व्यवस्थित तरीके से गायब किया गया और पूरे मामले को दबाने की कोशिश भी की गई।
एफआईआर से पहले बरामद रकम पर उठाए सवाल
बार एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में उन रकमों का भी जिक्र किया है, जो कथित तौर पर एफआईआर दर्ज होने से पहले बरामद हुई थीं। शिकायत के अनुसार 5 जून 2026 को 58 लाख रुपये बरामद किए गए थे, जबकि 10 लाख रुपये गोबर से मिलने का भी दावा किया गया। आरोप है कि इन दोनों बरामदगियों का न तो एफआईआर में उल्लेख किया गया और न ही इन्हें सार्वजनिक किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पहले कथित तौर पर रकम निकाल ली गई और बाद में उसे बरामद दिखाने की कोशिश की गई।
एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल
वकीलों ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि जनता के बढ़ते दबाव के बाद एसआईटी बनाई गई, लेकिन उसका उद्देश्य ट्रस्ट की छवि बचाना था। आरोप लगाया गया है कि एसआईटी स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर रही और उसकी जांच का इस्तेमाल वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारियों को बचाने के लिए किया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उनके नाम शुरुआती एफआईआर में शामिल ही नहीं किए गए।
असली आरोपियों को बचाने का आरोप
बार एसोसिएशन का आरोप है कि मामले की पहली एफआईआर इस तरह तैयार की गई कि वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय ही न हो सके। शिकायत में कहा गया है कि जांच के बावजूद कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की गई। शिकायत में ट्रस्टी कृष्ण मोहन द्वारा दर्ज कराई गई मूल शिकायत का भी हवाला दिया गया है और दावा किया गया है कि पूरे मामले की दिशा जानबूझकर बदलने का प्रयास हुआ। वकीलों ने इसे श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ बड़ा धोखा बताया है।
अब तक 8 गिरफ्तार, ट्रस्ट बैठक पर नजर
राम मंदिर चढ़ावा गबन का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई। अब तक दान संग्रह और गिनती से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान अलग-अलग आरोपियों से लाखों रुपये नकद, सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा भी बरामद हुई है। विपक्ष इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और न्यायिक जांच की मांग कर रहा है। वहीं 6 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इस पूरे विवाद पर चर्चा होने की संभावना है।
