मालवीय नगर होटल अग्निकांड: 21 मौतों के बाद मालिक गिरफ्तार; पूछताछ में बोला- ‘दिल्ली में सब चलता है’

नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण होटल अग्निकांड के बाद गिरफ्तार होटल मालिक लवकेश कुमार बजाज को लेकर जांच में कई सनसनीखेज बातें सामने आई हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान उसने कोई खास पछतावा नहीं दिखाया और यहां तक कह दिया कि “दिल्ली में सब चलता है”। अधिकारियों का दावा है कि होटल से कमाई शुरू होने के बाद उसमें यह सोच विकसित हो गई थी कि नियमों को नजरअंदाज कर भी कारोबार चलाया जा सकता है। इसी मानसिकता के चलते उसने कथित तौर पर ढाई मंजिला इमारत को बढ़ाकर पांच मंजिल तक पहुंचा दिया और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करता रहा।

6 कमरों की अनुमति, लेकिन 24 कमरे चल रहे थे
जांच में सामने आया है कि हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी निर्धारित क्षमता से कई गुना ज्यादा चलाया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार होटल को केवल 6 कमरों की अनुमति मिली थी, लेकिन वहां 24 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इसके अलावा बेसमेंट में रेस्टोरेंट भी चलाया जा रहा था, जबकि अनुमति सिर्फ चाय और स्नैक्स की दुकान के लिए थी। पुलिस का कहना है कि इमारत के पास स्वीकृत बिल्डिंग प्लान नहीं था और फायर सेफ्टी एनओसी भी नहीं ली गई थी। इसके बावजूद होटल में प्रतिदिन 3 हजार से 15 हजार रुपए तक किराया वसूला जा रहा था।

आग लगने के बाद भी मदद नहीं करने का आरोप
घटना के प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद वसीम खान ने दावा किया है कि आग लगने के बाद उन्होंने होटल मालिक को फोन कर हालात की जानकारी दी थी। उनके मुताबिक करीब 26 सेकंड तक दोनों के बीच बातचीत हुई। वसीम का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद बजाज घटनास्थल पर आया जरूर, लेकिन वहां फंसे लोगों को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि उस समय हालात बेहद गंभीर थे और लोगों के बचने की संभावना लगातार कम होती जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

मैनेजर फरार, पांच टीमें तलाश में जुटीं
पुलिस ने होटल मालिक को गिरफ्तार कर चार दिन की रिमांड पर लिया है, लेकिन होटल मैनेजर जय मिश्रा अब भी फरार है। जांच एजेंसियों का मानना है कि होटल के लाइसेंस और संचालन से जुड़े कई अहम जवाब उसके पास हो सकते हैं। दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय कुमार ने बताया कि होटल में मौजूद स्टाफ के ज्यादातर सदस्य भी घटना के बाद से गायब हैं। पुलिस की पांच अलग-अलग टीमें जय मिश्रा और अन्य कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इन लोगों से पूछताछ के बाद कई और अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

एक ही रास्ता, बंद खिड़कियां और सेंसर डोर बने मौत का जाल
बुधवार सुबह लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। मृतकों में 18 विदेशी नागरिक बताए गए हैं, जिनमें अफ्रीकी देशों, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के लोग शामिल थे। जांच में पता चला है कि इमारत में आने-जाने का सिर्फ एक रास्ता था। कई खिड़कियां बंद थीं और मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर आधारित था। अधिकारियों का कहना है कि इन खामियों ने इमारत को एक तरह से मौत के जाल में बदल दिया। आग फैलने के बाद लोगों के पास बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता नहीं बचा।

2010 कॉमनवेल्थ गेम्स से मिली थी अस्थायी अनुमति, 2022 में खरीदी थी बिल्डिंग
सूत्रों के मुताबिक इस इमारत को 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान होटल कमरों की कमी को देखते हुए अस्थायी आवास लाइसेंस दिया गया था। बाद में यह संपत्ति अलग-अलग हाथों से गुजरती हुई 2022 में लवकेश कुमार बजाज के पास पहुंची। पूछताछ में बजाज ने पुलिस को बताया कि उसके पास इलाके में कम से कम चार होटल हैं और वह रोजमर्रा के संचालन में ज्यादा दखल नहीं देता था। उसने दावा किया कि उसने होटल का प्रबंधन जय मिश्रा को सौंप रखा था। हालांकि पुलिस इस दलील को जांच के दायरे में रखकर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रही है।

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