नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर दो दिन चली उच्चस्तरीय वार्ता समाप्त हो गई है। दोनों देशों ने बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन और गैर-टैरिफ बाधाओं जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। लक्ष्य है कि 24 जुलाई से पहले एक अंतरिम ट्रेड डील को अंतिम रूप दे दिया जाए, ताकि अमेरिकी अस्थायी 10% टैरिफ खत्म होने से पहले समझौता हो सके।
दो दिन चली मंत्रीस्तरीय बातचीत
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीयर 22 से 24 जून तक भारत दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई दौर की बैठकें कीं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के प्रमुख तत्वों की व्यापक समीक्षा की और हाल के महीनों में वार्ता में “महत्वपूर्ण प्रगति” दर्ज की गई है।
मार्केट एक्सेस और डिजिटल ट्रेड पर जोर
बैठकों में भारतीय और अमेरिकी उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि समझौता संतुलित, व्यावसायिक रूप से उपयोगी और किसानों, कारोबारियों, श्रमिकों तथा उपभोक्ताओं के हित में होना चाहिए।
24 जुलाई की समयसीमा बनी अहम
दोनों देश 24 जुलाई से पहले अंतरिम समझौता करना चाहते हैं। दरअसल अमेरिका ने फिलहाल सभी देशों पर 10% का अस्थायी आयात शुल्क लगाया हुआ है, जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो रही है। इसके बाद अमेरिकी व्यापार नीति में फिर बदलाव संभव है। इसी वजह से भारत और अमेरिका जल्द से जल्द समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
मोदी-ट्रम्प मुलाकात से मिली रफ्तार
17 जून को फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के बाद व्यापार वार्ताओं को नई गति मिली। दोनों नेताओं ने अधिकारियों को जल्द समझौता पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ही ग्रीयर का भारत दौरा हुआ और बातचीत आगे बढ़ी।
भारत-अमेरिका व्यापार का बढ़ता महत्व
वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 52.9 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में व्यापार को और बढ़ाना तथा विश्वसनीय सप्लाई चेन तैयार करना है। भारत ने अमेरिका से ऊर्जा, विमान, प्रौद्योगिकी उत्पाद और अन्य वस्तुओं की बड़े पैमाने पर खरीद की भी इच्छा जताई है।
