नेशनल डेस्क. केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगाए गए सभी अस्थायी प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए सरकार ने एहतियात के तौर पर ये पाबंदियां लागू की थीं। अब हालात सामान्य होने और ईंधन आपूर्ति स्थिर होने के बाद सरकार ने इन प्रतिबंधों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इससे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी पहले की तरह सामान्य तरीके से पेट्रोल और डीजल मिल सकेगा।
युद्ध के दौरान लगाई गई थीं पाबंदियां
सरकार ने युद्ध के दौरान आशंका जताई थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से कमर्शियल उपभोक्ताओं को रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी गई थी। डीजल की दैनिक खरीद पर भी सीमा तय कर दी गई थी ताकि आम लोगों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रहे। इन कदमों का उद्देश्य संभावित आपूर्ति संकट से देश को बचाना था।
कमर्शियल एलपीजी सप्लाई भी हुई बहाल
सरकार ने पिछले सप्ताह कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई भी पहले की तरह बहाल कर दी थी। युद्ध के दौरान घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटल, रेस्तरां, बेकरी और उद्योगों को मिलने वाली एलपीजी की आपूर्ति घटा दी गई थी। इसके कारण कई व्यावसायिक उपभोक्ताओं को डीजल और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ा था। अब आपूर्ति सामान्य होने पर तेल विपणन कंपनियों को फिर से पूरी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पीएनजी अपनाने वालों के लिए नियम रहेगा लागू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं ने पहले ही पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपना ली है, उन्हें दोबारा एलपीजी पर लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के रूप में पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि बल्क एलपीजी पर लगी पाबंदियों में भी आंशिक राहत दी गई है और अब उपभोक्ता संकट से पहले की खपत का 50 प्रतिशत तक एलपीजी ले सकेंगे।
आपूर्ति सामान्य, राहत की उम्मीद
सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू भंडार पर्याप्त होने के कारण ईंधन आपूर्ति अब सामान्य स्थिति में लौट आई है। 1 जुलाई से पेट्रोल, डीजल और कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता पहले की तरह हो जाएगी। इससे परिवहन, होटल, उद्योग और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए भी ईंधन आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी।
