परिसीमन बिल पर अभी फैसला नहीं, संसद में पेश होने के बाद तय करेंगे रुख: डीएमके

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तमिलनाडु। प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने फिलहाल कोई अंतिम रुख नहीं अपनाया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि संसद में विधेयक पेश होने के बाद ही उसके प्रावधानों का अध्ययन कर आधिकारिक फैसला लिया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटी हुई है।

सांसदों की बैठक में लिया गया फैसला
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को पार्टी के सभी सांसदों की बैठक बुलाई। बैठक में तय किया गया कि परिसीमन विधेयक संसद में पेश होने के बाद ही पार्टी अपनी आधिकारिक राय देगी। पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि अभी तक डीएमके ने इस मुद्दे पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है।

कांग्रेस बना रही विपक्षी रणनीति
डीएमके का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी डीएमके, आम आदमी पार्टी समेत सभी सहयोगी दलों के संपर्क में है, ताकि परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर साझा रणनीति बनाई जा सके।

लोकसभा की 850 सीटों का प्रस्ताव
केंद्र सरकार मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश कर सकती है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और नए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। इस विधेयक को संसद से पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में आवश्यक बहुमत जुटाना होगा।

पी. चिदंबरम ने लगाए आरोप
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया कि भाजपा इस विधेयक के समर्थन के लिए डीएमके और एनसीपी (एसपी) जैसे दलों से संपर्क कर रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से पुनर्गठन का रास्ता तैयार करना है।

दक्षिणी राज्यों की चिंता
चिदंबरम ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों की लोकसभा में राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि असम और जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं और इसी वजह से इस प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा जरूरी है।

मानसून सत्र में रहेगा बड़ा मुद्दा
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र शुरू होने से पहले 19 जुलाई को केंद्र सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाएगी, जबकि 20 जुलाई को इंडिया गठबंधन की रणनीति बैठक होगी। ऐसे में संसद में विधेयक पेश होने के बाद डीएमके का अंतिम रुख राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।