West Bengal OBC Bill:बंगाल में ओबीसी सूची से 77 मुस्लिम समुदाय बाहर, विधानसभा से संशोधन बिल पास; आरक्षण 10% से घटाकर 7% किया

suvendu adhikari suvendu adhikari

नेशनल डेस्क. पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को ओबीसी आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े दो अहम विधेयक पारित कर दिए। इन संशोधनों के तहत ओबीसी सूची से 77 मुस्लिम समुदायों को बाहर कर दिया गया है। यह कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के मई 2024 के आदेश के बाद उठाया गया है। इसके साथ ही राज्य में ओबीसी आरक्षण 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि अब केवल सर्वे के आधार पर पात्र समुदायों को ही ओबीसी का लाभ मिलेगा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदला कानून
विधानसभा में पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरिशंकर घोष ने पश्चिम बंगाल बैकवर्ड क्लासेज रिजर्वेशन संशोधन विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज संशोधन विधेयक 2026 पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने बिना सर्वे केवल मुस्लिम समुदायों को लाभ पहुंचाने के लिए कई जातियों को ओबीसी सूची में शामिल किया था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ऐसी सभी श्रेणियों को हटाया गया है। अब केवल 66 समुदायों को ओबीसी सूची में रखा गया है, जिन्हें सर्वे के बाद पात्र पाया गया।

आरक्षण 10% से घटाकर 7% किया
सरकार ने ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत भी 10 से घटाकर 7 कर दिया है। साथ ही ओबीसी श्रेणियों का नया पुनर्गठन किया गया है। संशोधित कानून के अनुसार पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग अब सभी समुदायों का सामाजिक और आर्थिक सर्वे करेगा। सरकार का दावा है कि इससे फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी और केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही आरक्षण का लाभ मिलेगा।

किन समुदायों को रखा गया, किन्हें हटाया गया
नई सूची में जोलाह (अंसारी मोमिन), फकीर, पहाड़िया मुस्लिम, हज्जाम (मुस्लिम) और चौदुली (मुस्लिम) जैसे 66 समुदायों को बरकरार रखा गया है। वहीं मुस्लिम नेहरिया, मुस्लिम हलदार, मुस्लिम सनपुई, मुस्लिम माली, घोषी (मुस्लिम), मुस्लिम दर्जी, मुस्लिम राजमिस्त्री, मुस्लिम मोल्ला और अन्य कुल 77 समुदायों को सूची से हटा दिया गया है। राज्य सरकार ने मई में ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी, लेकिन अब विधानसभा से कानून में औपचारिक संशोधन भी पारित हो गया।

हाईकोर्ट की टिप्पणी और राजनीतिक विवाद
यह मामला 2010 से 2020 के बीच दायर कई याचिकाओं के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि बिना उचित सामाजिक और आर्थिक मूल्यांकन के 77 मुस्लिम समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया। अदालत ने इसे राजनीतिक लाभ और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ते हुए गंभीर टिप्पणी की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उस फैसले को भाजपा के प्रभाव में दिया गया निर्णय बताया था। अब नई भाजपा सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप कानून में बदलाव कर दिया है।