नेशनल डेस्क. कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती दौर के सबसे चर्चित मामलों में शामिल कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट अपहरण, रेप और हत्या मामले में 36 साल बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जम्मू-कश्मीर स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने प्रतिबंधित जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों के खिलाफ 737 पन्नों की चार्जशीट एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल की है। एजेंसी का दावा है कि सरला भट का अपहरण, यातना और हत्या सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा थी और मामले में वर्षों बाद जुटाए गए नए सबूतों के आधार पर आरोप तय किए गए हैं।
1990 में हुआ था अपहरण, रेप और हत्या
एसआईए के अनुसार, सरला भट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) में नर्स थीं। 12 अप्रैल 1990 की रात ड्यूटी खत्म कर हॉस्टल लौटते समय उन्हें कथित तौर पर एक सफेद मारुति कार में अगवा कर लिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर शारीरिक यातनाएं दी गईं, उनके साथ दुष्कर्म किया गया और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो से तीन दिन बाद उनका शव श्रीनगर की एक सड़क किनारे मिला। शव के पास एक हस्तलिखित पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें कथित तौर पर सीआईडी का मुखबिर बताते हुए हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी। हालांकि जांच में इसका कोई सबूत नहीं मिला।
आतंकवाद के दौर में ठंडी पड़ गई थी जांच
घटना के बाद हत्या, आपराधिक साजिश और टाडा की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन उस समय घाटी में चरम आतंकवाद के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी। कई पुलिस अधिकारी खुद आतंकी हमलों के निशाने पर थे, जबकि बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ चुके थे। एसआईए के मुताबिक शुरुआती जांच में कई गंभीर कमियां रहीं। बरामद हथियारों की बैलिस्टिक जांच नहीं हुई, शव के पास मिली चिट्ठी की हैंडराइटिंग जांच नहीं कराई गई और कई अहम दस्तावेज भी गायब हो गए। समय बीतने के साथ कई गवाहों की मौत हो गई या उनका पता लगाना मुश्किल हो गया।
2024 में दोबारा खुला मामला
कश्मीरी पंडित संगठनों की मांग के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर 2024 में इस मामले की दोबारा जांच एसआईए को सौंपी गई। एजेंसी ने नए सिरे से छापेमारी, दस्तावेजों की जांच, गवाहों से पूछताछ और फोरेंसिक, मेडिकल, बैलिस्टिक तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया। एसआईए ने इसे आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों में न्याय की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। एजेंसी का कहना है कि आतंकवाद के मामलों में समय कभी भी आरोपियों की ढाल नहीं बन सकता।
यासीन मलिक समेत पांच आरोपी नामजद
चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चलकू, अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सूफी को आरोपी बनाया गया है। एसआईए के अनुसार, खुर्शीद चलकू पाकिस्तान में छिपा हुआ है और उसके खिलाफ उद्घोषणा की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। तीन आरोपी अब जीवित नहीं हैं, जबकि यासीन मलिक पहले से दूसरे मामले में न्यायिक हिरासत में है। एजेंसी का दावा है कि जांच में सामने आया है कि उस समय जेकेएलएफ के चीफ कमांडर रहे यासीन मलिक और अन्य आरोपियों ने अपहरण और हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया।
