नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के साथ मिलकर ऐसी नई व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या कम की जा सके और लोगों को समय पर न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में देरी रोकना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए नए आपराधिक कानूनों के तहत कई सुधार किए जा रहे हैं।
जांच और फोरेंसिक को मजबूत करने पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस-2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में अमित शाह ने पुलिस और फोरेंसिक अधिकारियों से कहा कि अपराध स्थल से सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे दूषित न हों। उन्होंने कहा कि समय पर चार्जशीट दाखिल करना, अभियोजकों के साथ समन्वय रखना और मामलों की लगातार निगरानी करना तेज न्याय के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के साथ नई प्रणाली पर काम
अमित शाह ने कहा कि पुराने आपराधिक कानूनों की खामियों की पहचान की गई थी और उनमें से करीब 90 प्रतिशत कमियों को दूर किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करने में जुटा है, जो उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में मामलों के बोझ के कारण होने वाली देरी को कम कर सके। उनका कहना था कि न्याय प्रणाली का उद्देश्य लोगों को समय पर न्याय दिलाना होना चाहिए।
एआई और डेटा विश्लेषण से अपराध पर नजर
गृह मंत्री ने कहा कि अपराध से जुड़ा डेटा और सूचनाएं तभी उपयोगी बनती हैं जब उन्हें इंटेलिजेंस में बदला जाए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अपराध के पैटर्न की पहचान कर कई अपराधों को पहले ही रोका जा सकता है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने भी जानकारी और रणनीति के जरिए पांडवों को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
एनएएफआईएस के ज्यादा इस्तेमाल की जरूरत
अमित शाह ने कहा कि नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) कई जटिल मामलों को सुलझाने में मददगार साबित हुआ है, लेकिन इसका उपयोग अभी भी अपेक्षित स्तर से काफी कम है। उन्होंने कहा कि अपराध स्थलों से अधिक से अधिक फिंगरप्रिंट एकत्र कर डेटाबेस को समृद्ध किया जाना चाहिए, ताकि अपराधियों की पहचान और अभियोजन दोनों को मजबूत किया जा सके।
नई आपराधिक न्याय व्यवस्था पर फोकस
गृह मंत्री ने कहा कि देश आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का उपयोग केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अभियोजन और सजा की प्रक्रिया तक इसका विस्तार होना चाहिए। शाह ने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों को कम करना, जांच की गुणवत्ता सुधारना और डिजिटल व फोरेंसिक तकनीकों का व्यापक उपयोग ही समय पर न्याय सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
