भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रगति: 4 दिन की बातचीत पूरी; दोनों देशों ने समझौते की प्रतिबद्धता दोहराई

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर नई दिल्ली में चार दिन तक चली अहम वार्ता गुरुवार को समाप्त हो गई। दोनों देशों ने बातचीत के बाद एक साझा समझ विकसित करने और जल्द समझौते तक पहुंचने की प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्र सरकार के मुताबिक 1 से 4 जून तक अमेरिका के मुख्य वार्ताकार के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत में मौजूद रहा। इस दौरान कई संवेदनशील व्यापारिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि दोनों पक्ष अब अंतरिम ट्रेड डील के पहले से कहीं ज्यादा करीब पहुंच गए हैं।

किस-किस मुद्दे पर हुई बातचीत?
सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार वार्ता के दौरान व्यापार और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। इनमें वस्तुओं का व्यापार, गैर-शुल्क बाधाएं, कस्टम व्यवस्था, व्यापार सुगमता, आर्थिक सुरक्षा समन्वय और अन्य साझा हितों वाले क्षेत्र शामिल रहे। दोनों पक्षों ने इन मुद्दों पर रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक वार्ता का फोकस ऐसे समाधान तलाशने पर रहा, जिससे दोनों देशों के कारोबारी हितों को फायदा पहुंचे और व्यापारिक अड़चनें कम हों। यही वजह है कि बातचीत को सकारात्मक माहौल में संपन्न बताया गया है।

बयान में दिखी समझौते की स्पष्ट इच्छा
भारत सरकार ने कहा कि पूरी बातचीत सहयोग और व्यावहारिक दृष्टिकोण की भावना के साथ आगे बढ़ी। दोनों देशों ने एक ऐसे समझौते की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई, जो दोनों के लिए लाभकारी हो। सरकार के अनुसार प्रस्तावित समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और अब व्यापक व्यापार समझौता उस साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने की कोशिश माना जा रहा है।

इस बीच अमेरिका ने 60 देशों पर उठाए सवाल
ट्रेड वार्ता ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों के खिलाफ संभावित व्यापारिक कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने हाल ही में कहा कि इन देशों ने कथित तौर पर फोर्स्ड लेबर यानी जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने और उस पर प्रभावी कार्रवाई करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। अमेरिकी कानून के तहत ऐसी स्थिति को व्यापारिक कार्रवाई के लिए आधार माना जा सकता है। इस सूची में भारत के अलावा चीन, जापान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं।

अमेरिका ने क्यों जताई चिंता?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की ओर से फोर्स्ड लेबर से जुड़े आयात पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं किया जाना स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार इससे अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। हालांकि इस विवाद के बावजूद भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखी। यही संकेत देता है कि दोनों देश मतभेदों को अलग रखते हुए आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।

ट्रेड डील से क्या बदल सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम ट्रेड डील पर सहमति बन जाती है तो दोनों देशों के बीच कई उत्पादों पर व्यापार आसान हो सकता है। कस्टम प्रक्रियाओं में सुधार, बाजार तक बेहतर पहुंच और निवेश के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। भारत और अमेरिका पहले ही एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। ऐसे में प्रस्तावित समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नई गति दे सकता है। फिलहाल दोनों देशों की नजर अगले दौर की बातचीत पर है, जहां लंबित मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश होगी।

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