नेशनल डेस्क। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा अब संसद के उच्च सदन में नजर आ सकते हैं। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें पवन खेड़ा का नाम भी शामिल है। उन्हें कर्नाटक से उम्मीदवार बनाया गया है। उनके साथ मंसूर अली खान को भी टिकट मिला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम भी सूची में शामिल है। यह पवन खेड़ा का पहला राज्यसभा चुनाव होगा और जीत के साथ उनकी संसदीय राजनीति में औपचारिक एंट्री हो जाएगी।
10 राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होना है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मणिपुर जैसे राज्य शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है। कांग्रेस ने समय रहते अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं और कई राज्यों में संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है।
मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी
कांग्रेस की सूची में कई पुराने और भरोसेमंद नेताओं को जगह मिली है। मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया है। राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेतृत्व लगातार रणनीति बनाने में जुटा हुआ है ताकि उच्च सदन में अपनी उपस्थिति को और मजबूत किया जा सके।
असम के मुख्यमंत्री से विवाद के बाद सुर्खियों में आए थे खेड़ा
पवन खेड़ा हाल के महीनों में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ तीखी राजनीतिक टकराव को लेकर चर्चा में रहे थे। खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर विदेशी संपत्ति और पासपोर्ट से जुड़े आरोप लगाए थे। इसके बाद रिंकी भुइयां सरमा ने इन आरोपों को झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और असम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने कई धाराओं में मामला दर्ज किया था, जिसके बाद यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
जमानत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
मामले की जांच के दौरान असम पुलिस दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास तक भी पहुंची थी। खेड़ा ने पहले अंतरिम राहत हासिल की, लेकिन बाद में कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई। मई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देते हुए राहत दी। अदालत ने शुरुआती टिप्पणी में कहा था कि मामले में लगाए गए आरोप और जवाबी आरोप राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित प्रतीत होते हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल जमानत याचिका तक सीमित हैं और जांच या ट्रायल के नतीजों को प्रभावित नहीं करेंगी।
राज्यसभा टिकट से कांग्रेस का स्पष्ट संदेश
राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने को कांग्रेस नेतृत्व के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के सबसे मुखर प्रवक्ताओं में शामिल पवन खेड़ा लंबे समय से मीडिया और राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस का पक्ष रखते रहे हैं। ऐसे समय में जब वह कानूनी और राजनीतिक दोनों चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, राज्यसभा टिकट यह संकेत देता है कि पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। यदि वह निर्वाचित होते हैं तो पहली बार संसद के भीतर कांग्रेस की ओर से अपनी भूमिका निभाते नजर आएंगे।
