न्यूज डेस्क।झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। एक सीट पर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम के खाते में गई। चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि मतदान के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने पूरे समीकरण को बदल दिया।
24 विधायकों के दम पर मिली 28 वोट
सबसे ज्यादा चर्चा परिमल नथवानी की जीत को लेकर हो रही है। विधानसभा में एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं, लेकिन नथवानी को 28 वोट मिले। इससे साफ संकेत मिला कि विपक्षी खेमे के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले। यह तब हुआ जब इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं और वह दोनों सीटें जीतने का दावा कर रहा था।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
नतीजों के बाद कांग्रेस ने खुलकर नाराजगी जताई। पार्टी के झारखंड प्रभारी के राजू ने आरोप लगाया कि निर्दलीय उम्मीदवार ने पैसे का इस्तेमाल कर चुनाव प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के सभी 16 वोट सुरक्षित रहे और JMM के चार वोट भी कांग्रेस उम्मीदवार को मिले। उनके मुताबिक इसी वजह से नहीं बल्कि अन्य कारणों से परिणाम प्रभावित हुए हैं।
JMM उम्मीदवार ने दर्ज की आसान जीत
दूसरी सीट पर JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने 30 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। गठबंधन के भीतर हुई रणनीति के चलते उनकी स्थिति शुरू से मजबूत मानी जा रही थी। हालांकि एक सीट पर मिली जीत के बावजूद इंडिया गठबंधन के लिए यह चुनाव पूरी तरह संतोषजनक नहीं माना जा रहा, क्योंकि दूसरी सीट पर उसे अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।
तीन वोट हुए अमान्य
मतगणना के दौरान तीन वोट अमान्य घोषित किए गए। इनमें भाजपा के दो और कांग्रेस का एक वोट शामिल बताया गया है। चुनावी मुकाबले में इन अमान्य मतों ने भी चर्चा बटोरी। राजनीतिक दल अब यह समझने में जुटे हैं कि आखिर क्रॉस वोटिंग किन विधायकों ने की और उसका असर किस हद तक पड़ा।
राजनीतिक संदेश भी छोड़ गए नतीजे
यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि एक सीट JMM संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने से रिक्त हुई। नतीजों ने साफ कर दिया है कि झारखंड की राजनीति में विधायकों की निष्ठा और गठबंधन की एकजुटता अब भी बड़ा सवाल बनी हुई है। आने वाले दिनों में क्रॉस वोटिंग को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
