नेशनल डेस्क। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सीएम विजय ने राज्य के विजिलेंस एंड एंटी करप्शन निदेशालय (DVAC) के निदेशक ए. अरुण को नियुक्ति के करीब दो महीने बाद ही पद से हटा दिया है। उनकी जगह आईपीएस अधिकारी सी. महेश्वरी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ए. अरुण की नियुक्ति शुरू से ही विवादों में रही थी और इस पर मद्रास हाईकोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणियां की थीं।
ए. अरुण को मिली नई जिम्मेदारी
राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) रैंक के अधिकारी ए. अरुण को अब चेन्नई स्थित तमिलनाडु पुलिस अकादमी का निदेशक नियुक्त किया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव के. मणिवासन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक यह तबादला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सी. महेश्वरी संभालेंगी DVAC की कमान
इंस्पेक्टर जनरल (IG) रैंक की अधिकारी सी. महेश्वरी, जो अब तक विजिलेंस एंड एंटी करप्शन निदेशालय की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल में तैनात थीं, उन्हें DVAC निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सरकार ने इसे प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा बताया है।
नियुक्ति के साथ ही शुरू हो गया था विवाद
सीएम विजय सरकार ने मई 2026 में ए. अरुण को DVAC प्रमुख बनाया था, लेकिन उनकी नियुक्ति पर विपक्ष और कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए थे। विधानसभा चुनाव के दौरान तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने उन्हें “डीएमके समर्थक अधिकारी” बताते हुए उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे। उस समय वे ग्रेटर चेन्नई पुलिस कमिश्नर थे।
चुनाव आयोग ने भी की थी कार्रवाई
2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने तक ए. अरुण को अनिवार्य प्रतीक्षा (Compulsory Wait) पर भेज दिया था। विपक्ष ने उन पर प्रशासनिक पक्षपात के आरोप लगाए थे।
मद्रास हाईकोर्ट ने जताई थी चिंता
ए. अरुण की नियुक्ति को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने भी गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि विजिलेंस एंड एंटी करप्शन निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर केवल बेदाग छवि और उच्च ईमानदारी वाले अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए। कोर्ट ने पूर्व निदेशकों सी.वी. नरसिम्हन और सी.एल. रामकृष्णन का उदाहरण देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कभी कोई आरोप नहीं लगा।
‘सीजर की पत्नी’ वाली टिप्पणी भी आई थी
मद्रास हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि जैसे “सीजर की पत्नी संदेह से परे होनी चाहिए”, उसी तरह विजिलेंस एंड एंटी करप्शन निदेशक का पद भी ऐसे अधिकारी के पास होना चाहिए जिसकी निष्पक्षता और ईमानदारी पर कोई सवाल न उठे। अदालत की इसी टिप्पणी के बाद ए. अरुण की नियुक्ति लगातार चर्चा में बनी रही।
दो महीने में फैसला बना चर्चा का विषय
ए. अरुण को महज दो महीने के भीतर पद से हटाए जाने से तमिलनाडु की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक फेरबदल बताया है, लेकिन उनकी विवादित नियुक्ति और हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बीच लिया गया यह फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
