नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद पार्टी के भीतर ही विवादों में घिर गए हैं। श्रीनगर दौरे के दौरान थरूर ने जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति की दिशा में हो रही प्रगति की सराहना की। इसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने इसे केंद्र सरकार की नीतियों की पुष्टि बताया।
कश्मीर दौरे पर क्या बोले थरूर
श्रीनगर पहुंचने के बाद थरूर ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राज्य में सामान्य स्थिति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि कई चुनौतियां अब भी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक माहौल महसूस हुआ। थरूर ने उपराज्यपाल द्वारा विभिन्न सामाजिक और साहित्यिक संगठनों से संवाद को भी सकारात्मक कदम बताया।
कांग्रेस नेताओं ने जताई नाराजगी
थरूर की टिप्पणी के बाद कांग्रेस के भीतर असहमति सामने आ गई। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता Ravinder Sharma ने कहा कि थरूर को घाटी के आम लोगों से भी मिलना चाहिए था ताकि वे जमीनी हालात को बेहतर तरीके से समझ पाते। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि थरूर का बयान कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाता।
पार्टी की रणनीति पर उठे सवाल
कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म करने और सामान्य स्थिति बहाल करने में विफल रहने का आरोप लगाती रही है। ऐसे में थरूर की ओर से “सामान्य स्थिति की दिशा में प्रगति” की बात कहे जाने से पार्टी के भीतर असहजता बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान ने कांग्रेस के अंदर कश्मीर मुद्दे पर अलग-अलग सोच को उजागर कर दिया है।
BJP ने कांग्रेस पर किया पलटवार
BJP ने थरूर के बयान को कांग्रेस के दावों के उलट बताया। पार्टी प्रवक्ता Abhijeet Jasrotia ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं और पिछले 18 महीनों में किसी भी कश्मीरी युवक के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि जमीनी आंकड़े केंद्र सरकार की नीतियों की सफलता दिखाते हैं।
बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
थरूर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब जम्मू-कश्मीर का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस जहां केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करती रही है, वहीं थरूर के बयान ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।
