बिजनेस डेस्क. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे यानी एनएफआर ने अप्रैल 2026 में माल परिवहन के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। एनएफआर ने इस दौरान कुल 0.972 मिलियन टन माल लोडिंग की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.6 प्रतिशत ज्यादा है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक यह उपलब्धि बेहतर परिचालन क्षमता, समय पर परिवहन और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं की वजह से हासिल हुई है। पूर्वोत्तर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों का असर भी माल ढुलाई के आंकड़ों में साफ दिखाई दिया।
सीमेंट और कोयला लोडिंग में बड़ा उछाल
अप्रैल 2026 के दौरान कई प्रमुख सामग्रियों की लोडिंग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा वृद्धि सीमेंट लोडिंग में देखने को मिली, जिसमें 329 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ। इसके अलावा कोयला लोडिंग में 141.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि निर्माण गतिविधियों और ऊर्जा जरूरतों में बढ़ोतरी की वजह से इन दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ी है। डोलोमाइट लोडिंग में भी 20.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो औद्योगिक उत्पादन में तेजी का संकेत मानी जा रही है।
‘अन्य’ श्रेणी में 190% की बढ़ोतरी
एनएफआर के आंकड़ों के मुताबिक “अन्य” श्रेणी में आने वाली विविध सामग्रियों की लोडिंग में 190 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई। रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार का परिणाम है। लगातार बढ़ती माल ढुलाई ने क्षेत्रीय सप्लाई चेन नेटवर्क को और मजबूत किया है। साथ ही इससे रेलवे की राजस्व आय में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
आर्थिक गतिविधियों को मिला बल
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि माल लोडिंग में हो रही लगातार वृद्धि पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार को दर्शाती है। एनएफआर ने समय पर परिवहन और बेहतर लॉजिस्टिक सेवाओं के जरिए व्यापारिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाई है। रेलवे का फोकस अब तकनीकी सुधार और परिचालन दक्षता को और मजबूत करने पर है ताकि आने वाले महीनों में भी यह वृद्धि जारी रखी जा सके।
तकनीकी सुधार पर रहेगा जोर
एनएफआर ने कहा है कि भविष्य में ग्राहक-केंद्रित सेवाओं, तकनीकी प्रगति और बेहतर परिचालन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। रेलवे प्रशासन का उद्देश्य माल परिवहन को और तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
