नेशनल डेस्क। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी छात्रवृत्ति से जुड़े करीब एक करोड़ रुपए के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आया है कि मैनेजमेंट कॉलेज के छात्रों के नाम पर 118 फर्जी बैंक खाते खोलकर करीब 99.49 लाख रुपए की छात्रवृत्ति की राशि निकाल ली गई। हैरानी की बात यह है कि जिन छात्रों के नाम पर खाते खोले गए, उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं थी। CBI ने इस मामले में यूको बैंक के तत्कालीन बैंक मैनेजर समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
22 महीनों तक चला हेराफेरी का खेल
जांच एजेंसी के मुताबिक यह पूरा खेल जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच अंजाम दिया गया। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन और यूको बैंक की हबीबगंज शाखा के अधिकारियों ने मिलकर छात्रों के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया। छात्रों के नाम पर बैंक खाते खोले गए, लेकिन न तो उनसे आवेदन कराया गया और न ही उन्हें छात्रवृत्ति मिलने की जानकारी दी गई। सरकारी राशि सीधे इन खातों में पहुंची और कुछ ही समय बाद निकाल ली गई।
हस्ताक्षर तक फर्जी तैयार किए गए
CBI की जांच में सामने आया कि खाते खोलने के लिए छात्रों के आवेदन पत्र और हस्ताक्षर तक फर्जी तरीके से तैयार किए गए। कई फॉर्म में गलत व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की गई और बैंक का अनिवार्य ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) सत्यापन भी नियमों के विपरीत पूरा किया गया। इतना ही नहीं, कॉलेज की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्र भी फर्जी पाए गए, जिनके आधार पर खाते खोले गए।
खातों में छात्रों की जगह कर्मचारियों के नंबर
जांच में यह भी पता चला कि बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर छात्रों के नहीं, बल्कि कॉलेज कर्मचारियों और उनके करीबी लोगों के थे। इसी वजह से बैंक लेनदेन के दौरान आने वाले OTP सीधे आरोपियों के मोबाइल पर पहुंचते थे। खातों के एटीएम कार्ड भी छात्रों को नहीं दिए गए, बल्कि कॉलेज कर्मचारी राम सिंह वर्मा के पास रखे गए। छात्रवृत्ति की राशि खाते में आते ही एटीएम और OTP की मदद से तुरंत पैसे निकाल लिए जाते थे।
रिकॉर्ड की जांच में घोटाले का खुलासा
पूरा मामला तब सामने आया जब यूको बैंक के भोपाल जोनल हेड और डिप्टी जनरल मैनेजर लोकेश कुमार ने संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद CBI ने प्रारंभिक जांच शुरू की। बैंक रिकॉर्ड, खाता खोलने के दस्तावेज और छात्रवृत्ति भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरह का फर्जीवाड़ा प्रदेश के अन्य कॉलेजों में भी किया गया।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
CBI ने इस मामले में यूको बैंक की तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक प्रेमा वर्मा, एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज के निदेशक विनय मल्होत्रा, प्रोफेसर आदित्य मल्होत्रा, सहायक प्रोफेसर मनोज जैन, सहायक प्रोफेसर विनेश मेश्राम और कॉलेज कर्मचारी राम सिंह वर्मा को आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अलावा धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और कॉलेज प्रबंधन ने दावा किया है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है।
