TMC में ‘असली’ लड़ाई: Election Commission का नोटिस; Mamata और Ritabrata गुट से 6 जुलाई तक मांगा जवाब

TMC TMC

कोलकाता/नई दिल्ली डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर सत्ता संघर्ष अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को ममता बनर्जी और बागी नेता रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को नोटिस जारी कर 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक जवाब मांगा है। विवाद इस बात को लेकर है कि तृणमूल कांग्रेस का “असली” संगठन कौन है और पार्टी के चुनाव चिन्ह, बैंक खातों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं तथा संगठनात्मक नियंत्रण पर किसका अधिकार होगा। आयोग अब दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद आगे का फैसला करेगा।

विधानसभा चुनाव हार के बाद बढ़ा विवाद

हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। इसी दौरान रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक गुट अलग हो गया और उसने ममता बनर्जी तथा अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दे दी। बागी गुट का दावा है कि उसके साथ पार्टी के 80 में से 65 से ज्यादा विधायक हैं। रिताब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी चुना जा चुका है। इसी बहुमत के आधार पर बागी गुट खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहा है।

चुनाव आयोग पहुंचा बागी गुट

रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। बैठक के बाद रिताब्रत ने कहा कि आयोग की पूर्ण पीठ ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज तथा तर्क आयोग के सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से आयोजित 22 जून की विशेष संगठनात्मक बैठक पार्टी के संविधान के अनुसार हुई थी और उसी के आधार पर आयोग से मान्यता की मांग की गई है।

संगठन पर भी ठोका दावा

बागी गुट ने केवल विधायकों के समर्थन का दावा ही नहीं किया, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में भी बड़े बदलाव का ऐलान किया। विशेष बैठक में वरिष्ठ विधायक अरूप राय को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित किया गया। साथ ही ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने और अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने का भी दावा किया गया। रिताब्रत ने कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक, पार्षद, नगर निकाय प्रतिनिधि और जिला परिषद सदस्य हैं। उनका कहना है कि संगठन और विधायकों दोनों का बहुमत उनके साथ होने के कारण वही असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस हैं।

ममता खेमे ने दावों को बताया निराधार

ममता बनर्जी के समर्थकों ने बागी गुट के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल की पहचान केवल विधायकों की संख्या से नहीं होती, बल्कि संगठनात्मक ढांचे और पार्टी संविधान से तय होती है। ममता खेमे का दावा है कि पार्टी का पूरा संगठन आज भी उनके नियंत्रण में है। वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से किसी तरह की बैठक नहीं मांगी थी और सवाल उठाया कि पार्टी से निष्कासित व्यक्ति को आयोग ने किस आधार पर मिलने का समय दिया।

महुआ मोइत्रा का चुनाव आयोग और बागी गुट पर हमला

तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोकतंत्र को गायब करने वाले लोगों के पास अब तृणमूल का चुनाव चिन्ह गायब कराने की कोशिश की जा रही है। महुआ ने कहा कि रिताब्रत बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की मूल विचारधारा को आज तक समझ ही नहीं पाए हैं। उनके मुताबिक तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं और जनता इस पूरे घटनाक्रम का सही जवाब देगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

तृणमूल सांसद सागरिका घोष और वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के शिवसेना मामले के फैसले के अनुसार किसी राजनीतिक दल की विधायी इकाई अपने आप संगठन पर दावा नहीं कर सकती। उनका कहना है कि केवल विधायकों का बहुमत किसी गुट को पार्टी का वास्तविक उत्तराधिकारी नहीं बना देता। वहीं चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से 6 जुलाई तक विस्तृत जवाब मांगा है। इसके बाद आयोग उपलब्ध दस्तावेजों और दावों की जांच करेगा। इस फैसले पर पूरे देश की नजर रहेगी क्योंकि इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय हो सकती है।