CM Yogi का Digi Rover मिशन: GNSS तकनीक से होगी सटीक जमीन पैमाइश; घटेंगे विवाद, बढ़ेगी पारदर्शिता

CM Yogi Adityanath CM Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश डेस्क। उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन से जुड़े विवादों को तेजी से खत्म करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर से पूरे प्रदेश में ‘डिजी रोवर (GNSS) विशेष भूमि पैमाइश अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश की सभी तहसीलों में जमीन की पैमाइश और सीमांकन से जुड़े लंबित मामलों का निपटारा आधुनिक GNSS तकनीक से किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे किसानों और जमीन मालिकों को तेज, पारदर्शी और सटीक सेवाएं मिलेंगी।

79 हजार से ज्यादा लंबित मामलों का होगा समाधान

राज्य सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश में भूमि राजस्व अधिनियम की धारा-24 के तहत 79,157 भूमि पैमाइश और सीमांकन के मामले लंबे समय से लंबित हैं। विशेष अभियान के दौरान इन सभी मामलों का मिशन मोड में निस्तारण करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि वर्षों से लंबित विवाद खत्म होने से किसानों, ग्रामीणों और अन्य भूमि स्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही राजस्व विभाग पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा और भविष्य में विवादों की संख्या घटेगी।

क्या है Digi Rover और कैसे करेगा काम?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब तक जमीन की पैमाइश पारंपरिक चेन और अन्य पुराने तरीकों से की जाती रही है, जिससे कई बार त्रुटियां सामने आती थीं। Digi Rover GNSS तकनीक सैटेलाइट आधारित आधुनिक प्रणाली है, जो जमीन की सटीक लोकेशन और सीमाओं का डिजिटल तरीके से निर्धारण करती है। इससे माप में गलती की संभावना काफी कम होगी। जमीन के नक्शे और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर भी घटेगा, जिससे विवाद और मुकदमेबाजी में कमी आने की उम्मीद है।

किसानों और आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?

सरकार का कहना है कि नई तकनीक अपनाने से राजस्व सेवाएं पहले से कहीं अधिक तेज और पारदर्शी होंगी। किसानों को बार-बार तहसील और सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सीमांकन प्रक्रिया स्पष्ट होने से कब्जे, खेत की सीमा और जमीन के स्वामित्व को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी। प्रशासन का मानना है कि सटीक पैमाइश होने से अदालतों में चल रहे कई मामलों का भी जल्द समाधान संभव होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद कम करने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को अभियान को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हर पात्र नागरिक को तय समय सीमा के भीतर इस अभियान का लाभ मिलना चाहिए। साथ ही सभी पैमाइश तकनीकी मानकों के अनुसार हो और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। सरकार चाहती है कि यह अभियान केवल लंबित मामलों का निपटारा ही नहीं करे, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत तकनीकी व्यवस्था तैयार करे।

बोर्ड ऑफ रेवेन्यू करेगा निगरानी

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने अभियान के संचालन के लिए सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल पूरे अभियान की उच्चस्तरीय निगरानी करेंगी। वहीं बोर्ड के आयुक्त और सचिव समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करेंगे। अभियान को सफल बनाने के लिए मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी (राजस्व), एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

टेक्नोलॉजी आधारित राजस्व व्यवस्था पर सरकार का जोर

योगी सरकार का कहना है कि Digi Rover अभियान उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार का उद्देश्य केवल जमीन की पैमाइश करना नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक, जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है। यदि यह अभियान सफल रहता है तो भविष्य में भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि किसानों के भूमि अधिकारों की बेहतर सुरक्षा, तेज सेवाएं और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश की राजस्व व्यवस्था को नई दिशा देगा।