भारत-पाक ट्रैक-2 वार्ता: विदेश सचिव का साफ संदेश; सरकार का कोई समर्थन नहीं, बैठकों की अहमियत नहीं

Vikram misri Vikram misri

नेशनल डेस्क। भारत-पाकिस्तान के बीच कथित ट्रैक-2 बातचीत को लेकर उठे सवालों पर भारत सरकार ने पहली बार स्पष्ट और सख्त रुख सामने रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत सरकार न तो ऐसी किसी ट्रैक-2 बैठक में आधिकारिक तौर पर शामिल है और न ही उसे समर्थन देती है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार ऐसी बैठकों को कोई मान्यता नहीं देती और भारत के लिए इनकी कोई विशेष अहमियत भी नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले एक साल में भारत और पाकिस्तान के बीच कई अनौपचारिक बैठकों की खबरें सामने आई थीं।

निजी बैठकें, सरकार का कोई संबंध नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि दुनिया भर में इस तरह की दर्जनों ट्रैक-2 बैठकें होती रहती हैं। ये पूरी तरह निजी संगठनों की पहल होती हैं और भारत सरकार का इनसे कोई आधिकारिक संबंध नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकार न इन बैठकों में हिस्सा लेती है, न इन्हें समर्थन देती है और न ही इन पर कोई आधिकारिक रुख आधारित करती है।

रिटायर्ड अधिकारी सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते
विदेश सचिव ने यह भी साफ किया कि यदि किसी ट्रैक-2 बैठक में भारत के पूर्व राजनयिक, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी या सिविल सोसाइटी के सदस्य शामिल होते हैं, तो वे केवल अपने व्यक्तिगत विचार रखते हैं। उनके बयान या राय को भारत सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभागी केवल स्वयं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

2008 के बाद नहीं हुई औपचारिक वार्ता
भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद से कोई औपचारिक और संरचित द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, समय-समय पर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सीमित स्तर पर बातचीत हुई। फरवरी 2021 में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्षविराम बहाल करने में भी अनौपचारिक सुरक्षा स्तर के संपर्कों की भूमिका रही थी। लेकिन अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए।

पहलगाम हमले के बाद और सख्त हुआ भारत
विदेश सचिव के बयान में यह भी साफ झलका कि भारत अब पाकिस्तान के साथ किसी भी अनौपचारिक पहल को सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानता। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने सहित कई कड़े कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए थे। ऐसे माहौल में सरकार ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी संवाद का फैसला केवल आधिकारिक स्तर पर और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही होगा।