विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को यात्रा दस्तावेज बताया, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट नियम, 1980 में अमेंडमेंट करते हुए पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार नई फीस 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। सबसे ज्यादा असर नए पासपोर्ट और तत्काल सेवा लेने वाले आवेदकों पर पड़ेगा। 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपए से बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दी गई है। वहीं टटकाल श्रेणी में यही पासपोर्ट बनवाने के लिए अब 5,000 रुपए चुकाने होंगे। सरकार ने संशोधित शुल्क संरचना को अधिसूचित कर दिया है और सभी पासपोर्ट सेवा केंद्रों में इसे लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।
36 और 60 पेज वाले पासपोर्ट दोनों महंगे
60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। नए नियमों के तहत 60 पेज के फ्रेश या री-इश्यू पासपोर्ट के लिए अब 3,500 रुपये देने होंगे, जबकि पहले इसकी फीस 2,000 रुपये थी। टटकाल श्रेणी में इसकी फीस 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दी गई है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि संशोधित शुल्क 1 जुलाई से लागू होंगे। इसके बाद आवेदन करने वाले सभी लोगों को नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। यह बदलाव सामान्य और टटकाल दोनों प्रकार की सेवाओं पर लागू रहेगा।
तत्काल सेवा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
विदेश मंत्रालय ने अधिसूचना में पासपोर्ट की वैधता से जुड़े प्रावधान भी दोहराए हैं। वयस्कों को जारी किए जाने वाले सामान्य पासपोर्ट की वैधता अधिकतम 10 वर्ष रहेगी। वहीं नाबालिगों के लिए जारी पासपोर्ट की वैधता पांच वर्ष या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगी, जो भी पहले हो। पासपोर्ट जारी करने की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल शुल्क संरचना को संशोधित किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वैधता अवधि से जुड़े नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को राहत जारी
सरकार ने कुछ श्रेणियों को राहत भी दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 8 वर्ष तक के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को नए पासपोर्ट आवेदन पर 10 प्रतिशत शुल्क छूट मिलती रहेगी। हालांकि यह छूट केवल फ्रेश पासपोर्ट आवेदन पर लागू होगी। री-इश्यू पासपोर्ट पर यह सुविधा नहीं मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि कमजोर और विशेष श्रेणी के आवेदकों को राहत देने के उद्देश्य से यह प्रावधान पहले की तरह जारी रखा गया है। नई शुल्क व्यवस्था में भी इस छूट को बरकरार रखा गया है।
पासपोर्ट की वैधता के नियम नहीं बदले
पासपोर्ट शुल्क बढ़ोतरी का फैसला ऐसे समय आया है जब विदेश मंत्रालय ने हाल ही में पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर भी स्पष्टीकरण जारी किया था। मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। अधिकारियों के मुताबिक पासपोर्ट का मूल उद्देश्य विदेश यात्रा को सक्षम बनाना और विदेशों में पहचान स्थापित करना है। नागरिकता निर्धारण के लिए अन्य कानूनी दस्तावेज और प्रक्रियाएं लागू होती हैं।
पासपोर्ट को लेकर हाल में क्या कहा था MEA ने
पासपोर्ट सेवा को लेकर हाल के वर्षों में आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ी है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्रों और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों के नेटवर्क का विस्तार किया गया है। इसके साथ ही ऑनलाइन आवेदन और अपॉइंटमेंट सिस्टम को भी मजबूत किया गया है। नई शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद भी आवेदन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। आवेदकों को पहले की तरह ऑनलाइन आवेदन करना होगा और निर्धारित केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक तथा दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
आवेदन प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी
नई फीस लागू होने से पहले आवेदन करने वालों और बाद में आवेदन करने वालों के बीच शुल्क का अंतर साफ दिखाई देगा। उदाहरण के लिए 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट पर 1,000 रुपये और टटकाल पासपोर्ट पर 1,500 रुपये अतिरिक्त खर्च करना होगा। इसी तरह 60 पेज वाले पासपोर्ट पर भी शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यात्रा, शिक्षा, रोजगार और प्रवास के लिए पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों को अब पहले के मुकाबले अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी।
नई फीस से यात्रियों पर कितना असर
विदेश मंत्रालय की अधिसूचना के बाद अब सभी पासपोर्ट सेवा केंद्रों को नई दरों के अनुरूप सिस्टम अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। 1 जुलाई 2026 के बाद जमा होने वाले सभी आवेदनों पर नई फीस स्वतः लागू हो जाएगी। मंत्रालय ने कहा है कि संशोधित नियम पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत निर्धारित अधिकारों का उपयोग करते हुए लागू किए गए हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य शुल्क संरचना को अद्यतन करना और पासपोर्ट सेवाओं के संचालन को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप बनाए रखना है।
