न्यूज डेस्क।शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह के बीच बड़ा बयान दिया है। पार्टी स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह पार्टी का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह शिवसेना की विचारधारा की लड़ाई नहीं छोड़ेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के नौ में से छह लोकसभा सांसद नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर चुके हैं।
नेतृत्व छोड़ने की पेशकश
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह किसी भी कार्यकर्ता को पार्टी की कमान सौंपने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “जिस दिन आपको लगे कि मैं इस पद के लिए सही नहीं हूं, मैं पद छोड़ दूंगा।” उन्होंने कहा कि कुछ लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पार्टी हिम्मत हार जाएगी, लेकिन शिवसेना (UBT) ऐसा नहीं करेगी और अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
सांसदों की बगावत से बढ़ा संकट
हाल के दिनों में शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बागी सांसदों ने संसदीय दल की अहम बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया। माना जा रहा है कि ये सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस घटनाक्रम को 2022 के विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।
मतदाताओं से मांगी माफी
उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को लेकर मतदाताओं से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि लोगों ने शिवसेना को वोट दिया था लेकिन उनके चुने हुए सांसद पार्टी छोड़कर चले गए। उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो उन्हें पहुंच से दूर बताते हैं। ठाकरे ने कहा कि अगर वह उपलब्ध नहीं थे तो फिर वे नेता चुनाव कैसे जीत पाए।
कांग्रेस से गठबंधन पर दी सफाई
पार्टी के कांग्रेस के साथ रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन का मतलब विलय नहीं है। उन्होंने कहा कि शिवसेना तीन दशक तक भाजपा के साथ रही लेकिन कभी उसमें विलय नहीं हुआ। ठाकरे ने दावा किया कि कांग्रेस ने कभी मातोश्री का अपमान नहीं किया, जबकि भाजपा पर उन्होंने तीखा हमला बोला और कहा कि कांग्रेस भाजपा के हिंदुत्व से बेहतर है।
शिंदे का पलटवार, बोले- अभी तो ट्रेलर है
दूसरी ओर एकनाथ शिंदे ने अपने कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा छोड़कर कांग्रेस और एनसीपी का साथ चुना। शिंदे ने कहा कि जो लोग कभी बालासाहेब की आलोचना करते थे, आज उन्हीं के साथ उद्धव बैठे हैं। उन्होंने राजनीतिक घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी तस्वीर अभी बाकी है।”
बालासाहेब की विरासत पर टकराव
एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनकी शिवसेना ही बालासाहेब ठाकरे के सपनों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने बालासाहेब का सपना पूरा किया है और उन्हें गर्व महसूस कराया है। वहीं उद्धव ठाकरे ने भी कार्यकर्ताओं से कहा कि बालासाहेब ने गद्दारों के खिलाफ लड़ने का संदेश दिया था और पार्टी उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगी। दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की विरासत को लेकर संघर्ष और तेज होने वाला है।
