न्यूज डेस्क। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, भारतीय नाविकों की मौत और बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले सप्ताह फ्रांस में आमने-सामने होंगे। व्हाइट हाउस ने शनिवार को जानकारी दी कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात तय है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत हाल ही में ओमान तट के पास हुए अमेरिकी हमलों में भारतीय नाविकों की मौत को लेकर वाशिंगटन के सामने कड़ा विरोध दर्ज करा चुका है। ऐसे में यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं बल्कि दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम कूटनीतिक परीक्षा भी मानी जा रही है।
नाविकों की मौत के बाद बढ़ा था तनाव
पिछले कुछ दिनों में भारत और अमेरिका के बीच होर्मुज क्षेत्र को लेकर असहज स्थिति देखने को मिली। ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने दो बार अमेरिकी राजनयिकों को तलब कर विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत में इस घटना पर कड़ा एतराज जताया था। भारत का कहना है कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में अब मोदी और ट्रम्प की मुलाकात पर खास नजर टिकी हुई है।
G7 सम्मेलन में वैश्विक संकटों पर होगी चर्चा
फ्रांस के एवियां शहर में 16 और 17 जून को G7 शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। भारत लगातार आठवीं बार इस सम्मेलन में विशेष आमंत्रित देश के रूप में हिस्सा ले रहा है। सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व संकट, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक सप्लाई चेन और समुद्री व्यापार जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार ट्रम्प सम्मेलन के दौरान कई विश्व नेताओं से मुलाकात करेंगे। इनमें यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy और मध्य-पूर्व के कई नेता भी शामिल हैं।
ट्रेड डील और रणनीतिक रिश्तों पर भी रहेगी नजर
मोदी और ट्रम्प की बैठक में सिर्फ सुरक्षा मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि व्यापार और निवेश पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देश पिछले कई महीनों से एक अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हाल ही में नई दिल्ली में चार दिन तक चली वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने प्रगति के संकेत दिए थे। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने श्रम मानकों और आयात नीतियों को लेकर भारत समेत कई देशों पर दबाव भी बढ़ाया है। ऐसे में G7 के दौरान होने वाली यह बैठक व्यापारिक रिश्तों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
भारत बोलेगा ग्लोबल साउथ की आवाज
फ्रांस रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि G7 में भारत की मौजूदगी देश के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ अपने हितों की नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं की भी आवाज उठाएगा। मोदी ने फ्रांस को भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे में G7 सम्मेलन भारत के लिए वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है।
ट्रम्प की वापसी के बाद पहली बड़ी मुलाकात
अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प की सत्ता में वापसी के बाद मोदी और ट्रम्प की यह सबसे महत्वपूर्ण आमने-सामने बैठकों में से एक होगी। दोनों नेताओं के बीच पहले भी व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां पहले से कहीं अधिक जटिल हैं। होर्मुज संकट, ईरान से जुड़ा तनाव, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मुद्दे इस बैठक को विशेष महत्व देते हैं। यही वजह है कि फ्रांस में होने वाली यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके संकेत पूरी दुनिया की नजर में होंगे।
