कर्नाटक में ‘नो आईडी, नो एंट्री’ नियम: बार-पब में उम्र जांच अनिवार्य; नाबालिगों को शराब परोसी तो होगी कार्रवाई

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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने नाबालिगों में बढ़ती शराब और तंबाकू की लत को देखते हुए सख्त कदम उठाया है। राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बार, पब, क्लब, ब्रेवरी, लाउंज, रेस्टोरेंट और शराब परोसने वाले सभी प्रतिष्ठानों में उम्र की जांच को अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए। अब बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को ऐसे प्रतिष्ठानों में प्रवेश देने या शराब परोसने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ लाइसेंसिंग का मामला नहीं, बल्कि युवाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

सभी प्रतिष्ठानों को जारी होंगे नोटिस, मालिक होंगे जिम्मेदार
प्रियंक खड़गे ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि राज्यभर के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शराब परोसने वाले सभी प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करें। नए निर्देशों के तहत ग्राहकों की उम्र की पुष्टि के लिए सरकारी पहचान पत्र की जांच अनिवार्य होगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी उल्लंघन की स्थिति में प्रतिष्ठान के मालिक, प्रबंधक और लाइसेंस धारक को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी जगहों पर सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था नियमों के अनुसार संचालित हो रही हो।

बेंगलुरु की स्टडी ने बढ़ाई सरकार की चिंता
सरकार का यह फैसला एक हालिया अध्ययन के बाद आया है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने बेंगलुरु में 4,093 छात्रों पर सर्वे किया था। अध्ययन में पाया गया कि हर तीन में से एक किशोर शराब या तंबाकू के सेवन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम में है। करीब 33 प्रतिशत छात्रों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की, जबकि लगभग 18 प्रतिशत तंबाकू की लत से प्रभावित पाए गए। शोधकर्ताओं के मुताबिक ये आंकड़े राज्य और राष्ट्रीय औसत दोनों से काफी अधिक हैं।

17 साल से पहले शराब की शुरुआत, कुछ मामलों में उम्र सिर्फ 8 साल
अध्ययन में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया। सर्वे में शामिल युवाओं के बीच शराब पीना शुरू करने की औसत उम्र 17 साल पाई गई। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने पहली बार शराब का सेवन 8 साल की उम्र में किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में नशे की शुरुआत भविष्य में गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इसी वजह से सरकार अब शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों की जवाबदेही तय करने और नियमों के पालन को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रही है।

21 साल से कम उम्र वालों को नहीं मिलेगी शराब, उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
कर्नाटक में कानूनी रूप से शराब पीने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है। वर्ष 2023 में इसे घटाकर 18 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन सार्वजनिक आपत्तियों और विरोध के बाद उसे वापस ले लिया गया। अब सरकार ने दोहराया है कि 21 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को शराब नहीं परोसी जा सकती। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। सरकार का कहना है कि व्यावसायिक लाभ के लिए युवाओं की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और नाबालिगों को शराब उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी।

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